
गोला । प्रखंड क्षेत्र के टोनागातू-बरियातू स्थित इंग्लैंड पावर प्लांट में मजदूरों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिख रहा है। लगातार अनदेखी और अधूरी मांगों से नाराज मजदूर हड़ताल पर उतर आए हैं और प्लांट का काम प्रभावित हो गया है। सवाल सीधा है—क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या अप्रिय घटना का इंतजार कर रहा है, तब ही नींद खुलेगी?
मजदूरों का आरोप है कि पिछले सप्ताह भी उन्होंने प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था। उस समय आश्वासन देकर मामला शांत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। नतीजा—मजदूर फिर से तपती धूप में सड़क पर खड़े होकर अपनी आवाज बुलंद करने को मजबूर हैं।
यह स्थिति केवल मजदूरों की पीड़ा नहीं, बल्कि प्रशासन और श्रम विभाग की निष्क्रियता को भी उजागर करती है। आखिर क्यों बार-बार मजदूरों को आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है? क्या उनकी समस्याएं इतनी मामूली हैं कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, या फिर जिम्मेदार विभाग जानबूझकर चुप्पी साधे हुए हैं?
मजदूरों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाता, तो यह हालात पैदा ही नहीं होते। लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि हर बार संघर्ष ही एकमात्र रास्ता बचता दिख रहा है।
बड़ा सवाल यह है—क्या प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप करेगा या फिर किसी बड़े नुकसान के बाद ही हरकत में आएगा? मजदूरों की चेतावनी साफ है, जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।