झारखंड में छात्र हितैषी, बिहार में क्यों खामोश? बाबूलाल पर राकेश सिन्हा का तंजBy Mid Time Bureau Wed, 26 August 2026 06:54 PM

रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा नेता एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि छात्रों के मुद्दे पर पत्र लिखना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है, तो उन्हें बिहार में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल के खिलाफ भी आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर छात्रों पर हुई कार्रवाई का विरोध करें।

राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा नेताओं की राजनीति में सुविधा के अनुसार नैतिकता का पैमाना बदल जाता है। झारखंड में छात्रों के प्रति चिंता जताई जाती है, जबकि बिहार में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मामले में चुप्पी साध ली जाती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या छात्रों के अधिकारों और लोकतंत्र का पैमाना राज्य बदलने के साथ बदल जाता है?

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना छात्रों का अधिकार है। सरकार का दायित्व है कि वह छात्रों की बात सुने, संवाद स्थापित करे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले। लाठीचार्ज और वाटर कैनन किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की पहली प्रतिक्रिया नहीं होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि बाबूलाल मरांडी को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या छात्रों पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल उचित है। यदि यह गलत है तो उन्हें बिहार सरकार से जवाब मांगने के साथ कार्रवाई की निंदा भी करनी चाहिए।

राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस छात्रों के अधिकार, लोकतांत्रिक आंदोलनों और संवाद की राजनीति में विश्वास करती है। उन्होंने बाबूलाल मरांडी से झारखंड तक सीमित बयानबाजी करने के बजाय बिहार के छात्रों के पक्ष में भी आवाज उठाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और राज्य के हितों के प्रति उनकी जिम्मेदारी भी है। इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर MMDR संशोधन विधेयक वापस लेने की मांग करनी चाहिए। यह विषय दलगत राजनीति से ऊपर उठकर झारखंड के हित से जुड़ा है। राकेश सिन्हा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को राज्यहित के मामलों में अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निभानी चाहिए।

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