‘2047 का विकसित भारत’ तभी संभव, जब झारखंड जैसे राज्य मजबूत हों, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र के सामने रखी कई मांगेंBy Mid Time Bureau Sat, 19 September 2026 05:06 PM

नई दिल्ली में ‘विकसित भारत’ को लेकर हुई चर्चा में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य की आर्थिक स्थिति और केंद्र की नीतियों के असर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था बढ़ाने से हासिल नहीं होगा, बल्कि राज्यों को भी पर्याप्त वित्तीय संसाधन और अधिकार देने होंगे।

राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों की अर्थव्यवस्था पर केंद्र की नीतियों का सीधा असर पड़ता है। उन्होंने GST में बदलाव और MGNREGA से VB-GRAM-G की ओर बदलाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि इससे झारखंड को करीब 6 से 8 हजार करोड़ रुपये का संभावित नुकसान हो सकता है।

खनिज क्षेत्र को लेकर भी उन्होंने अपनी चिंता सामने रखी। वित्त मंत्री के मुताबिक, खनन और खनिज विकास से जुड़े नियमों में बदलाव के कारण राज्य को करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। उन्होंने दोनों मामलों को मिलाकर करीब 20 से 22 हजार करोड़ रुपये के संभावित आर्थिक असर का अनुमान जताया।

उन्होंने MMDR एक्ट की धारा 9(D) का भी जिक्र किया। राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, इसके प्रावधानों का असर कोयला कंपनियों से राज्य को मिलने वाली करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि पर पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र से इस मुद्दे पर राज्य के वित्तीय हितों को ध्यान में रखने की मांग की।

विकास का मतलब सिर्फ GDP बढ़ना नहीं

वित्त मंत्री ने कहा कि विकसित भारत की तस्वीर केवल GDP या प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों से तय नहीं होनी चाहिए। विकास का असर लोगों की जिंदगी में दिखना भी जरूरी है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकास के अहम आधारों के तौर पर सामने रखा।

उन्होंने झारखंड की कृषि व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और खेती का एक बड़ा हिस्सा बारिश पर निर्भर है। ऐसे में सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने के साथ पशुपालन, मछली पालन और दूसरे कृषि आधारित क्षेत्रों को बढ़ावा देने की जरूरत है।

राधाकृष्ण किशोर ने गरीबी से जुड़े आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आंकड़े विकास की एक तस्वीर जरूर दिखाते हैं, लेकिन औसत आंकड़ों के आधार पर पूरी स्थिति को नहीं समझा जा सकता। यह देखना जरूरी है कि आर्थिक विकास का फायदा समाज के अलग-अलग वर्गों तक किस तरह पहुंच रहा है।

केंद्र के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें

कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने झारखंड की ओर से तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप राज्यों को खनिजों पर सेस लगाने का अधिकार मिलना चाहिए। इसके अलावा GST में बदलाव से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई की मांग की।

तीसरी मांग पिछड़े राज्यों के लिए G-RAM-G योजना में फंडिंग पैटर्न को लेकर रही। राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र से इसमें 90:10 के अनुपात को लागू करने की मांग रखी, ताकि राज्यों पर वित्तीय दबाव कम हो।

उन्होंने झारखंड की मौजूदा वित्तीय स्थिति का भी उल्लेख किया और राजस्व संग्रह, राजकोषीय घाटे, पूंजीगत खर्च और कर्ज से जुड़े आंकड़े सामने रखे। अपने संबोधन में उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि 2047 के विकसित भारत का लक्ष्य राज्यों की आर्थिक मजबूती से जुड़ा हुआ है।