विकसित भारत के लिए पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग जरूरी: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोरBy Mid Time Bureau Sat, 19 September 2026 05:38 PM

नई दिल्ली। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन “विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण” में झारखंड के वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। 18–19 सितंबर को आयोजित सम्मेलन में केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री एवं प्रतिनिधि शामिल हुए।

अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समतामूलक और सशक्त समाज का निर्माण भी इसका महत्वपूर्ण आधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए दलीय राजनीति से ऊपर उठकर आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग और पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति आय, जीडीपी, विनिर्माण उत्पादन और अन्य वित्तीय आंकड़े तभी सार्थक होंगे, जब देश की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भी सुधार दिखाई दे। उन्होंने आय की असमानता और सामाजिक विभाजन को विकास के समक्ष महत्वपूर्ण चुनौती बताया तथा नीति आयोग के आंकड़ों के संदर्भ में गरीबी उन्मूलन के प्रयासों को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश बढ़ाने पर जोर

वित्त मंत्री ने कृषि क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि देश की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है और कृषि का एक बड़ा हिस्सा आज भी वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में सिंचाई, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में वित्तपोषण बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी निवेश को प्राथमिकता देने की बात कही।

झारखंड के राजस्व हितों का मुद्दा उठाया

झारखंड के संदर्भ में वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र की नीतियों के कारण राज्य को लगभग 20,000 से 22,000 करोड़ रुपये की संभावित आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने खनिज क्षेत्र में हुए बदलावों और कर नीतियों के राज्य के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा सम्मेलन में रखा।

इसके साथ ही उन्होंने झारखंड की वित्तीय स्थिति और उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य नीति आयोग की ‘अचीवर’ श्रेणी में शामिल है। राज्य का राजस्व संग्रह मजबूत है, राजकोषीय घाटा नियंत्रित है तथा पूंजीगत व्यय भी उच्च स्तर पर बना हुआ है।

केंद्र के समक्ष रखीं तीन प्रमुख मांगें

वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार के समक्ष झारखंड के हितों से जुड़ी तीन प्रमुख मांगें रखीं—

खनन पर सेस लगाने का अधिकार पुनर्बहाल किया जाए।
जीएसटी से हुई क्षति की भरपाई की जाए।
जी-राम-जी योजना में 90:10 का वित्तीय अनुपात पुनर्बहाल किया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्यों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन और अधिकार मिलने से ही वे विकास की प्रक्रिया को गति दे सकेंगे और राज्यों के सशक्त होने से ही विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।

सम्मेलन में झारखंड के प्रतिनिधिमंडल में वित्त सचिव श्री प्रशांत कुमार, अपर सचिव श्री कर्ण सत्यार्थी, श्री चंद्रभूषण प्रसाद (संयुक्त सचिव), श्री अनिरबान आईच (माननीय मंत्री के आप्त सचिव) और श्री नरेंद्र कुमार (माननीय मंत्री के आप्त सचिव) उपस्थित रहे।