JSSC-CGL भर्ती परीक्षा पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा हमला, बदलते हलफनामों पर उठाए सवालBy Mid Time Bureau Sat, 19 September 2026 05:58 PM

JSSC-CGL भर्ती परीक्षा को लेकर झारखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अदालत में सरकार की ओर से दाखिल किए गए अलग-अलग हलफनामों को लेकर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर सरकार अब अदालत में JSSC-CGL परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को दूषित बता रही है, तो पहले दाखिल किए गए हलफनामों में क्या कहा गया था और उस समय पूरी सच्चाई अदालत के सामने क्यों नहीं रखी गई? उन्होंने सवाल किया कि जवाबदेही सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की ही क्यों तय हो रही है और ऊपर बैठे जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच क्यों नहीं की जा रही?

नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार के हालिया हलफनामे के बाद सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक की भूमिका और जवाबदेही की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी थी, तो पहले न्यायालय के सामने पूरे तथ्य क्यों नहीं रखे गए? क्या पहले की जांच में अदालत के सामने अधूरी जानकारी रखी गई थी?

मरांडी ने यह भी सवाल उठाया कि पहले परीक्षा में किसी बड़ी गड़बड़ी से इनकार करने की बात कही गई और अब पूरी प्रक्रिया को दूषित बताया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि इस बदलाव के पीछे क्या वजह है और पहले का शपथपत्र किसके कहने पर दाखिल किया गया था।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जवाबदेही पर भी उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री की जानकारी और सहमति के बिना इतना बड़ा मामला संभव था? अगर सरकार को इसकी जानकारी नहीं थी तो शासन और निगरानी की व्यवस्था कहां थी? वहीं, अगर जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

उन्होंने कहा कि अगर भर्ती प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी हुई, तो यह सवाल भी उठना स्वाभाविक है कि क्या इतना बड़ा खेल सिर्फ निचले स्तर के लोगों के दम पर संभव था। उन्होंने JSSC के अध्यक्ष और सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उनकी जवाबदेही तय करने की मांग की।

CID की जांच पर भी सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने CID की पहले की जांच को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि अगर पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित थी, तो CID की जांच में यह बात पहले सामने क्यों नहीं आई। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं जांच में केवल उन्हीं तथ्यों को सामने न रखा जाए, जिनसे प्रभावशाली लोगों की कथित भूमिका पर पर्दा बना रहे।

मरांडी ने CID की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस जांच की निष्पक्षता को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे हों, उसके भरोसे लाखों छात्रों के भविष्य को नहीं छोड़ा जा सकता।

CBI जांच की मांग

बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर पूरे मामले की CBI से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि JSSC और JPSC जैसी भर्ती संस्थाओं की साख केवल बयान या सफाई से वापस नहीं आएगी, बल्कि इसके लिए पूरे मामले की सच्चाई सामने आना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।

उन्होंने प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता को JSSC से हटाने तथा मनोज कौशिक को CID ADG के पद से हटाने की मांग की। साथ ही अनुराग गुप्ता समेत उन सभी अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की, जिनके कार्यकाल में कथित भर्ती गड़बड़ी हुई।

मरांडी ने कहा कि जांच में जिन लोगों के खिलाफ साक्ष्य सामने आएं, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाकर जिम्मेदार अधिकारियों की कुर्सियां बचाने का खेल बंद होना चाहिए और परीक्षा प्रक्रिया को दूषित करने के साथ-साथ उस पर पर्दा डालने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।