दिल्ली विस्फोट मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, घाटी में 13 ठिकानों पर छापेमारीBy Admin Thu, 13 November 2025 04:47 AM









श्रीनगर — जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग (सीआईके) ने दिल्ली आतंकी विस्फोट से जुड़े मामले में गुरुवार को कश्मीर घाटी में 13 स्थानों पर छापेमारी की।

अधिकारियों के अनुसार, ये एक साथ कई जिलों में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से जुड़े ठिकानों पर की जा रही हैं। इन छापों का संबंध दिल्ली विस्फोट मामले से है, जिसमें पुलवामा निवासी स्थानीय डॉक्टर मोहम्मद उमर की संलिप्तता सामने आई थी।

इस बीच, जांच में डॉ. मोहम्मद उमर की मां का डीएनए मिलान सकारात्मक पाया गया, जिससे उसकी पहचान की पुष्टि हो गई है।

बताया गया है कि उमर फरीदाबाद में आतंकवादी मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बाद से फरार था। इस मॉड्यूल में उसके साथी — कुलगाम के डॉ. आदिल और पुलवामा के कोइल गांव के डॉ. मुज़म्मिल गनाई — को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में साथ काम करने वाली लखनऊ की डॉ. शाहीन शाहिद को भी गिरफ्तार किया गया था, जब उसकी कार से एक असॉल्ट राइफल बरामद की गई। इसके बाद लखनऊ पुलिस ने बुधवार को उसके भाई को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।

डॉ. आदिल की गिरफ्तारी तब हुई जब सीसीटीवी फुटेज में उसे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के पोस्टर लगाते हुए देखा गया। अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में उसके लॉकर से एक एके-47 राइफल बरामद हुई। उसने अक्टूबर 2024 में अपनी नौकरी छोड़ दी थी।

डॉ. आदिल की पूछताछ में मिली जानकारी से डॉ. मुज़म्मिल गनाई की गिरफ्तारी हुई, जो अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में ही काम करता था। फरीदाबाद में पुलिस ने मुज़म्मिल के पास से करीब 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट जब्त किया।

गृह मंत्रालय (MHA) ने अब दिल्ली आतंकी विस्फोट की जांच एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंप दी है।

इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसमें डॉक्टर जैसे शिक्षित पेशेवरों की आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता सामने आई है — जिसे अब “व्हाइट कॉलर टेररिज्म” कहा जा रहा है।

डॉक्टरों द्वारा संचालित इस आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के उस निर्णय को सही साबित किया है, जिसमें उन्होंने आतंकी संबंध रखने वाले सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की थीं।

विडंबना यह है कि एल-जी सिन्हा के इस कदम की आलोचना कई राजनीतिक दलों, विशेषकर सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने की थी।

 

With inputs from IANS

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