धरती से समुद्र और आकाश तक: भारत ने सटीकता के साथ पाकिस्तान की आक्रामकता को कुचलाBy Admin Mon, 12 May 2025 01:33 PM









नई दिल्ली (IANS): जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद की रक्षा तैयारियों व जवाबी कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा सोमवार को वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने साझा किया।

एक उच्चस्तरीय ब्रीफिंग में लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई (महानिदेशक सैन्य संचालन) और वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद (महानिदेशक नौसैनिक संचालन) ने थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बीच बहुस्तरीय समन्वय की व्याख्या की। उन्होंने भारत की रणनीति को संतुलित, सशक्त और अभेद्य बताया।

थलसेना की भूमिका: सीमाओं का सम्मान करते हुए सुरक्षा
लेफ्टिनेंट जनरल घई ने स्पष्ट किया कि भारत ने न तो नियंत्रण रेखा (LoC) और न ही अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा, “सभी रक्षा कार्रवाई भारतीय सीमा के भीतर रहकर ही की गई,” और मीडिया में आई किसी भी अति-आक्रामकता की खबरों को खारिज किया।

उन्होंने आतंकवाद की बदलती रणनीति पर चिंता जताई, खासकर 2024 में शिव खोरी (भगवान शिव को समर्पित गुफा मंदिर) और पहलगाम में हुए नागरिकों को लक्षित आतंकी हमलों को रणनीतिक चेतावनी के रूप में रेखांकित किया।

9 से 10 मई के बीच पाकिस्तान वायुसेना द्वारा भारतीय वायु क्षेत्र में भेजे गए ड्रोन हमलों को भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली ने पूरी तरह निष्फल कर दिया। उन्होंने कहा, “एक भी ड्रोन हमारी रक्षा परत को पार नहीं कर सका।”

लेफ्टिनेंट जनरल घई के शब्दों में: “राख से राख, धूल से धूल” — दुश्मन के ड्रोन को पूरी तरह नष्ट कर देने का प्रतीकात्मक बयान।

उन्होंने बताया कि कुछ ड्रोन कंधे पर रखे जाने वाले हथियारों से गिराए गए, जबकि अन्य को एकीकृत काउंटर-ड्रोन तकनीकों से निष्क्रिय किया गया। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सतर्क जवानों की भूमिका की भी सराहना की गई।

नौसेना की भूमिका: समुद्री क्षेत्र में पूर्ण प्रभुत्व
वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद ने नौसेना के अभियानों की जानकारी देते हुए बताया कि निरंतर निगरानी, लक्ष्य की पहचान और उसका पीछा करना समुद्री प्रभुत्व सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहे।

उन्नत सेंसरों और रियल-टाइम खुफिया सूचनाओं की मदद से नौसेना ने एक परतबद्ध बेड़ा वायु रक्षा प्रणाली के तहत काम किया, जो ड्रोन, मिसाइल और विमानों जैसे हवाई खतरों को भी निष्क्रिय करने में सक्षम है।

भारत का कैरियर बैटल ग्रुप, जिसमें MiG-29K लड़ाकू विमान और हवाई निगरानी विमान शामिल थे, नौसेना की वायु रक्षा की पहली पंक्ति बना रहा, जिससे समुद्री क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित हुआ।

वाइस एडमिरल प्रमोद ने कहा, “कोई भी दुश्मन विमान भारतीय बेड़े के पास तक नहीं आ सका,” और यह नौसेना के पायलटों की दिन-रात की तैयारी और युद्ध-कुशलता को दर्शाता है।

जटिल युद्ध परिदृश्य में नौसेना ने एंटी-मिसाइल और एंटी-एयरक्राफ्ट क्षमताओं का परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया। पाकिस्तान की नौसेना और वायुसेना को मकरान तट तक सीमित कर दिया गया, जिससे वे कोई प्रभावशाली प्रतिक्रिया नहीं दे सके।

उन्होंने जोड़ा, “हमारी नौसेना की उपस्थिति ने यह सुनिश्चित किया कि भारत जब चाहे तब जवाबी हमला कर सके।" यह भारतीय महासागर क्षेत्र में भारत की निर्णायक शक्ति और रोकथाम की क्षमता को दर्शाता है।

स्पष्ट संदेश: तीनों मोर्चों पर जबाबी हमला
ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई संयुक्त कार्रवाई ने भारत की रक्षा क्षमता ही नहीं, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि कोई भी भविष्य का सीमा-पार आतंकी हमला, भूमि, वायु और समुद्र — सभी मोर्चों पर तीव्र, निर्णायक और सर्वनाशक जवाब से टकराएगा।

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