एचएसबीसी फ्लैश पीएमआई: जनवरी में भारत में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र, दोनों की वृद्धि ने पकड़ी रफ्तारBy Admin Fri, 23 January 2026 05:24 AM









नई दिल्ली - एचएसबीसी फ्लैश पीएमआई के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में भारत में विनिर्माण और सेवा—दोनों क्षेत्रों में वृद्धि की गति तेज हुई है। नए ऑर्डरों और उत्पादन में तेज़ इजाफे के साथ-साथ रोजगार सृजन की बहाली और कारोबारी विश्वास में सुधार दर्ज किया गया है।

दिसंबर में 57.8 के मुकाबले जनवरी में बढ़कर 59.5 पर पहुंचा एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स—जो विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के संयुक्त उत्पादन में महीने-दर-महीने बदलाव को मापता है—दीर्घकालिक औसत से ऊपर की तेज़ विस्तार दर का संकेत देता है।

एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई (एसएंडपी ग्लोबल) के अनुसार, विनिर्माताओं और सेवा प्रदाताओं—दोनों के रुझानों में सुधार हुआ है। इस दौरान इनपुट लागत और आउटपुट शुल्क में महंगाई की समग्र दरें दिसंबर की तुलना में बढ़ी जरूर हैं, लेकिन अब भी नियंत्रित स्तर पर बनी हुई हैं।

एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी ने कहा, “एचएसबीसी फ्लैश पीएमआई के संकेतों के मुताबिक, विनिर्माण और सेवाओं—दोनों में वृद्धि ने रफ्तार पकड़ी है। हालांकि विनिर्माण पीएमआई में बढ़ोतरी के बावजूद, जनवरी का आंकड़ा 2025 के औसत से नीचे ही रहा।”

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के अंत में कुछ सुस्ती के बाद नए ऑर्डरों में तेज़ बढ़ोतरी हुई, जिसका नेतृत्व घरेलू मांग ने किया। इनपुट लागत का दबाव बढ़ा है, जो सेवा क्षेत्र की तुलना में वस्तु उत्पादकों के लिए अधिक रहा।

विनिर्माण कंपनियों और सेवा क्षेत्र—दोनों में उत्पादन की रफ्तार तेज हुई और वृद्धि दरें मोटे तौर पर समान रहीं।

रिपोर्ट में कहा गया कि निजी क्षेत्र की गतिविधियों में तेज़ी का मुख्य आधार नए कारोबार (न्यू बिजनेस इंटेक) में तेज़ विस्तार रहा। सर्वे में शामिल कंपनियों के अनुसार, मांग की मजबूती और आक्रामक मार्केटिंग अभियानों से बिक्री को सहारा मिला। हालांकि विनिर्माण क्षेत्र में उछाल अपेक्षाकृत तेज़ रहा, लेकिन सेवाओं में भी वृद्धि की गति बढ़ी।

“जनवरी के आंकड़ों में अंतरराष्ट्रीय ऑर्डरों में उल्लेखनीय उछाल दिखा, जो पिछले चार महीनों में सबसे तेज़ रहा। एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व हालिया महीने में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के प्रमुख गंतव्य रहे,” रिपोर्ट में कहा गया।

दिसंबर में रोजगार में कोई बदलाव नहीं होने के बाद, जनवरी में भारत के निजी क्षेत्र में भर्ती प्रक्रिया फिर से शुरू हुई।

आगामी 12 महीनों के कारोबारी परिदृश्य को लेकर भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियां आशावादी बनी हुई हैं।

 

With inputs from IANS

ADVERTISEMENT
Advertisement
ADVERTISEMENT
Advertisement

ADVERTISEMENT
Advertisement

ADVERTISEMENT
Advertisement
ADVERTISEMENT
Advertisement