अमेरिकी संग्रहालय तमिलनाडु से जुड़ी तीन भारतीय मूर्तियां भारत को लौटाएगाBy Admin Thu, 29 January 2026 06:28 AM









वॉशिंगटन: स्मिथसोनियन के नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट ने घोषणा की है कि वह दक्षिण भारत की तीन ऐतिहासिक कांस्य मूर्तियों को भारत को लौटाएगा। संग्रहालय द्वारा की गई प्रामाणिकता (प्रोवेनेंस) जांच में यह पुष्टि हुई कि इन कलाकृतियों को दशकों पहले मंदिर परिसरों से अवैध रूप से हटाया गया था।

संग्रहालय ने बुधवार (स्थानीय समय) को बताया कि इनमें से एक मूर्ति—चोल काल की “शिव नटराज”—भारतीय सरकार के साथ हुए समझौते के तहत दीर्घकालिक ऋण पर अमेरिका में ही रहेगी। इसके तहत संग्रहालय इस मूर्ति को प्रदर्शित करता रहेगा और इसके इतिहास, हटाए जाने और वापसी की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्ज करेगा।

तीनों मूर्तियां—“शिव नटराज” (चोल काल, लगभग 990 ई.), “सोमस्कंद” (चोल काल, 12वीं शताब्दी) और “संत सुंदरर पारवै के साथ” (विजयनगर काल, 16वीं शताब्दी)—दक्षिण भारतीय कांस्य ढलाई परंपरा के महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती हैं। एक मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार, ये मूर्तियां मूल रूप से तमिलनाडु के मंदिरों में जुलूसों के दौरान ले जाई जाने वाली पवित्र वस्तुएं थीं।

संग्रहालय ने बताया कि दीर्घकालिक ऋण पर रखी जाने वाली “शिव नटराज” मूर्ति को प्रदर्शनी “द आर्ट ऑफ नॉइंग इन साउथ एशिया, साउथईस्ट एशिया एंड द हिमालयाज” के तहत प्रदर्शित किया जाएगा।

यह फैसला संग्रहालय के दक्षिण एशियाई संग्रह की व्यवस्थित समीक्षा के तहत कई वर्षों तक चली जांच के बाद लिया गया है। वर्ष 2023 में फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पांडिचेरी के फोटो अभिलेखागार के साथ काम कर रहे शोधकर्ताओं ने पुष्टि की कि इन तीनों कांस्य मूर्तियों की तस्वीरें 1956 से 1959 के बीच तमिलनाडु के मंदिरों में ली गई थीं।

इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इन निष्कर्षों की समीक्षा की और तय किया कि इन मूर्तियों को भारतीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए हटाया गया था।

नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट के निदेशक चेज़ एफ. रॉबिन्सन ने कहा, “हम सांस्कृतिक धरोहर के जिम्मेदार संरक्षण और अपने संग्रह में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कठोर शोध के परिणामस्वरूप इन मूर्तियों की वापसी हमारे नैतिक संग्रहालय व्यवहार के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”

उन्होंने भारतीय सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इसके सहयोग से संग्रहालय लंबे समय से सराही जा रही शिव नटराज मूर्ति को आगंतुकों के लाभ के लिए प्रदर्शित करता रह सकेगा।

संग्रहालय ने बताया कि वह इस समझौते को औपचारिक रूप देने के लिए भारत के दूतावास के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस प्रक्रिया में संग्रहालय की प्रोवेनेंस टीम, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई कला के क्यूरेटर और अंतरराष्ट्रीय शोध साझेदारों ने सहयोग किया।

संग्रहालय के अनुसार, “शिव नटराज” मूल रूप से तमिलनाडु के तिरुत्तुरैपुंडी तालुक स्थित श्री भव औषधेश्वर मंदिर से संबंधित थी, जहां इसकी तस्वीर 1957 में ली गई थी। बाद में इसे 2002 में न्यूयॉर्क की डोरिस वीनर गैलरी से संग्रहालय ने खरीदा था। जांच में सामने आया कि बिक्री के लिए गैलरी द्वारा फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।

अन्य दो मूर्तियां 1987 में आर्थर एम. सैकलर द्वारा दान की गई लगभग 1,000 वस्तुओं के संग्रह का हिस्सा थीं। शोध में पुष्टि हुई कि “सोमस्कंद” की तस्वीर 1959 में अलत्तूर गांव के विश्वनाथ मंदिर में ली गई थी, जबकि “संत सुंदरर पारवै के साथ” की तस्वीर 1956 में वीरसोलापुरम गांव के एक शिव मंदिर में ली गई थी।

संग्रहालय ने बताया कि प्रोवेनेंस रिसर्च में वस्तुओं की भौतिक जांच के साथ-साथ निर्यात लाइसेंस, डीलर रिकॉर्ड, ऐतिहासिक तस्वीरें, पत्राचार और शिपिंग रिकॉर्ड जैसे दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा की जाती है, ताकि किसी कलाकृति के स्वामित्व का इतिहास पुनर्निर्मित किया जा सके।

गौरतलब है कि भारत लंबे समय से मंदिरों और पुरातात्विक स्थलों से अवैध रूप से हटाई गई सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी की मांग करता रहा है।

स्मिथसोनियन संस्थान दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय और शोध परिसर है, जो नेशनल मॉल पर स्थित कई संग्रहालयों का संचालन करता है और हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। 1923 में स्थापित नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट में एशियाई कला के विश्व के सबसे महत्वपूर्ण संग्रहों में से एक है और यह आम जनता के लिए निःशुल्क है।

 

With inputs from IANS

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