दुर्लभ मृदा खनिजों की खोज और खनन पर भारत का जोर, कई राज्यों में बड़े भंडार मिलेBy Admin Wed, 04 February 2026 03:55 AM









नई दिल्ली। भारत सरकार ने दुर्लभ मृदा तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) की खोज और खनन को तेज करने पर जोर दिया है। परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) की इकाई एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट फॉर एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च (एएमडी) देश के विभिन्न भू-वैज्ञानिक क्षेत्रों में तटीय और आंतरिक प्लेसर रेत तथा कठोर चट्टानों में इन खनिजों की खोज और भंडार बढ़ाने का काम कर रही है।

कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि 28 जनवरी 2026 तक एएमडी ने बीच सैंड मिनरल्स के 136 भंडारों का अनुमान लगाया है, जिनमें 13.15 मिलियन टन मोनाजाइट मौजूद है। मोनाजाइट थोरियम और दुर्लभ मृदा तत्वों से जुड़ा खनिज है। ये भंडार तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड और पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों, टेरी/लाल रेत और आंतरिक जलोढ़ क्षेत्रों में पाए गए हैं।

इन भंडारों में लगभग 7.23 मिलियन टन इन-सीटू रेयर अर्थ ऑक्साइड संसाधन मौजूद हैं। इसके अलावा राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में कठोर चट्टानों में दुर्लभ मृदा खनिजों के तीन भंडारों का भी अनुमान लगाया गया है, जिनमें करीब 1.29 मिलियन टन इन-सीटू रेयर अर्थ ऑक्साइड संसाधन हैं।

मंत्री ने बताया कि दुर्लभ मृदा तत्वों से युक्त अयस्क मोनाजाइट को रेडियोधर्मी तत्व यूरेनियम और थोरियम से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील पदार्थ माना जाता है। इसी वजह से इसके खनन, प्रसंस्करण और शोधन पर सरकार का नियंत्रण रहता है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के उन तीन से चार देशों में शामिल है, जिनके पास रेयर अर्थ क्षेत्र में संयंत्र, तकनीक और कुशल कार्यबल की क्षमता मौजूद है। हालांकि भारत में इन संसाधनों की गुणवत्ता अपेक्षाकृत कम है और रेडियोधर्मी तत्वों की मौजूदगी के कारण इनका निष्कर्षण जटिल, लंबा और महंगा हो जाता है। साथ ही भारत में मुख्य रूप से हल्के दुर्लभ मृदा तत्व ही पाए जाते हैं।

भारत के पास पर्याप्त संसाधन और निष्कर्षण व शोधन की क्षमता होने के बावजूद, इन खनिजों का व्यावसायिक खनन और प्रसंस्करण पर्याप्त तकनीक और रेयर अर्थ वैल्यू चेन के मध्य व अंतिम उद्योगों की कमी के कारण सीमित रहा है।

सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल नवंबर में ‘सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण को प्रोत्साहन योजना’ को मंजूरी दी थी। इस योजना पर 7,280 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसके तहत भारत में 6,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता वाले एकीकृत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) निर्माण की स्थापना की जाएगी।

 

With inputs from IANS

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