कश्मीर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध लागू; स्कूल-कॉलेज बंदBy Admin Mon, 02 March 2026 10:57 AM









श्रीनगर - कश्मीर घाटी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सोमवार को प्रशासन ने कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए। इसके साथ ही सभी शैक्षणिक संस्थानों को दो दिनों के लिए बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, ये प्रतिबंध अमेरिका–इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद उत्पन्न हालात में किसी भी शरारती या राष्ट्रविरोधी तत्व को लोगों की भावनाओं का दुरुपयोग करने से रोकने के लिए लगाए गए हैं।

श्रीनगर शहर के कई इलाकों में शिया मुस्लिम आबादी अच्छी-खासी संख्या में होने के कारण पुराने शहर और अपटाउन क्षेत्रों में प्रतिबंधों को और सख्ती से लागू किया जा रहा है।

सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय दो दिनों तक बंद रहेंगे। कश्मीर विश्वविद्यालय ने सोमवार और मंगलवार को होने वाली सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। लगभग तीन महीने की शीतकालीन छुट्टियों के बाद कक्षा 9 से 12 तक के स्कूल सोमवार से खुलने वाले थे।

शहर में भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। शहर के केंद्र लाल चौक में बैरिकेड्स लगाए गए हैं, जहां रविवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी अमेरिका–इज़रायल के हवाई हमलों में आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के विरोध में एकत्र हुए थे।

घाटी के सभी दस जिलों में प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। वहीं, लद्दाख प्रशासन भी स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है, क्योंकि लद्दाख यूटी का कारगिल जिला शिया बहुल है।

घाटी में एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पर भी रोक लगाई गई है, जबकि जिलों के बीच सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सोमवार को पूरी तरह निलंबित रहीं। हालांकि श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात सामान्य रूप से जारी है, लेकिन निजी वाहनों की संख्या कम रही।

रविवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए एक बैठक की, जबकि डीजीपी नलिन प्रभात फिलहाल श्रीनगर में मौजूद रहकर जमीनी स्तर पर सुरक्षा इंतजामों की निगरानी कर रहे हैं।

उपराज्यपाल ने रविवार को अपने संदेश में लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने एक्स पर कहा, “जम्मू-कश्मीर यूटी में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक की। सभी समुदायों से शांत और संयमित रहने का आग्रह किया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने में हमारी पुलिस और सुरक्षा बलों के अटूट और समन्वित संकल्प को मैं सलाम करता हूं।”

इस बीच, कश्मीरी डॉक्टरों और इंजीनियरों के अलावा करीब 1,200 स्थानीय छात्र इस समय ईरान में अध्ययन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “ईरान में हो रहे घटनाक्रम, विशेष रूप से ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या को लेकर मैं बेहद चिंतित हूं।

मैं सभी समुदायों से शांति बनाए रखने, सौहार्द कायम रखने और किसी भी ऐसे कदम से बचने की अपील करता हूं जिससे तनाव या अशांति फैल सकती है। हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर में शोक मना रहे लोगों को शांतिपूर्वक शोक व्यक्त करने दिया जाए। पुलिस और प्रशासन को अत्यंत संयम बरतना चाहिए और बल या अत्यधिक प्रतिबंधात्मक उपायों से बचना चाहिए। जम्मू-कश्मीर सरकार भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि ईरान में मौजूद जम्मू-कश्मीर के निवासियों, विशेषकर छात्रों, की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित की जा सके।”

 

With inputs from IANS

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