
दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं हो पाया है। बिल को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका, जिसके कारण यह अहम विधेयक अटक गया। यह बिल लंबे समय से देश की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। इसका उद्देश्य संसद और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था,
लेकिन इस बार भी इसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया। चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। जहां एक ओर सरकार इस बिल को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही थी, वहीं विपक्ष के कुछ दलों ने इसमें संशोधन की मांग उठाई।
कुछ नेताओं का कहना था कि महिला आरक्षण के भीतर ही अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से कोटा तय किया जाना चाहिए। हालांकि, इन मतभेदों के चलते बिल को जरूरी समर्थन नहीं मिल सका और यह लोकसभा में पास नहीं हो पाया। इससे एक बार फिर महिला आरक्षण का मुद्दा अधर में लटक गया है।