योग विश्व को शांति की दिशा देता है: प्रधानमंत्री मोदीBy Admin Sat, 21 June 2025 03:28 AM









विशाखापत्तनम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि जब दुनिया संघर्ष, अशांति और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, तब योग मानवता को शांति की दिशा दिखा रहा है।

11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उन्होंने वैश्विक समुदाय से आह्वान किया कि इस योग दिवस को "योग फॉर ह्यूमैनिटी 2.0" की शुरुआत मानें, जिसमें आत्मिक शांति को वैश्विक नीति का आधार बनाया जाए।

विशाखापत्तनम के आरके बीच पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने तीन लाख से अधिक लोगों के साथ कॉमन योगा प्रोटोकॉल (CYP) का अभ्यास किया। उन्होंने योग को आनंद और शांति का माध्यम बताया।

उन्होंने कहा कि योग दुनिया को संघर्ष से सहयोग, तनाव से समाधान की ओर ले जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “दुर्भाग्यवश आज पूरी दुनिया तनाव और अशांति से गुजर रही है। कई क्षेत्रों में अस्थिरता बढ़ रही है। ऐसे समय में योग हमें शांति की राह दिखाता है। योग मानवता के लिए वह 'पॉज़ बटन' है जिसकी ज़रूरत हमें फिर से संतुलन और पूर्णता पाने के लिए है।”

उन्होंने कहा कि योग केवल व्यक्तिगत अभ्यास तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह वैश्विक साझेदारी का माध्यम बने, जिसमें हर देश और समाज योग को अपने जीवन और सार्वजनिक नीति का हिस्सा बनाए।

प्रधानमंत्री ने 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन का एक संपूर्ण मार्ग है।

“योग का अर्थ है जोड़ना। इसने पूरे विश्व को जोड़ा है,” उन्होंने कहा।

प्रधानमंत्री ने याद किया कि 2014 में जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का प्रस्ताव रखा था, तो केवल कुछ ही समय में 175 देशों ने इसका समर्थन किया।

“यह समर्थन केवल एक प्रस्ताव का नहीं था, बल्कि यह मानव कल्याण के लिए पूरी दुनिया का एक सामूहिक प्रयास था,” उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा कि 11 वर्षों के बाद अब यह देखा जा सकता है कि योग करोड़ों लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। “चाहे वह ओपेरा हाउस की सीढ़ियां हों, माउंट एवरेस्ट की चोटी, या समुद्र की विशालता — हर स्थान से यही संदेश गूंजता है: योग सबके लिए है, योग सार्वभौमिक है, यह सीमाओं, पृष्ठभूमियों, उम्र या क्षमताओं से परे है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने गर्व के साथ बताया कि दिव्यांगजन ब्रेल में योग शास्त्र पढ़ रहे हैं, वैज्ञानिक अंतरिक्ष में योग कर रहे हैं, और ग्रामीण क्षेत्रों में युवा योग ओलंपियाड में भाग ले रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विशाखापत्तनम तट के पास नौसेना के पोतों पर भी योगाभ्यास किया गया।

प्रधानमंत्री ने योग के पीछे एकता की भावना को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम है — ‘योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ’। यह विषय एक गहरी सच्चाई को दर्शाता है: पृथ्वी पर हर अस्तित्व के स्वास्थ्य का आपस में संबंध है। मानव कल्याण उस मिट्टी की सेहत पर निर्भर है जिसमें हमारा अन्न उगता है, उन नदियों की स्वच्छता पर जो हमें जल देती हैं, और उन पशु-पक्षियों तथा पेड़-पौधों की स्थिति पर जो हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं। योग हमें इस आपसी जुड़ाव का अहसास कराता है, हमें एकता की ओर ले जाता है और यह सिखाता है कि हम अकेले नहीं हैं, बल्कि प्रकृति का अभिन्न हिस्सा हैं।”

इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नज़ीर, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री प्रकाश जाधव, केंद्रीय मंत्री के. राम मोहन नायडू, चंद्रशेखर पेम्मासानी, भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा, राज्य मंत्री नारा लोकेश और सत्य कुमार, तथा सांसद डी. पुरंदेश्वरी और एम. भारत भी उपस्थित थे।

 

With inputs from IANS

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