केंद्र की ‘श्रम विरोधी नीतियों’ के खिलाफ ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़तालBy Admin Wed, 09 July 2025 06:06 AM









नई दिल्ली — केंद्र सरकार की कथित "मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक" नीतियों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत राष्ट्रव्यापी हड़ताल बुधवार को पूरे देश में जारी है।

इस ‘भारत बंद’ का आह्वान केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा किया गया है, जिसे किसान संगठनों और ग्रामीण श्रमिक समूहों का भी समर्थन प्राप्त हुआ है।

हड़ताल में शामिल प्रमुख यूनियनें हैं:

  • ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)

  • इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)

  • सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU)

  • हिंद मजदूर सभा (HMS)

  • स्वयंरोज़गार महिला संघ (SEWA)

  • लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF)

  • यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC)

इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा और रेलवे, एनएमडीसी लिमिटेड, स्टील उद्योग सहित विभिन्न सार्वजनिक और ग्रामीण क्षेत्र की यूनियनें भी इस हड़ताल में शामिल हैं।

विवाद के केंद्र में संसद द्वारा पारित चार नए श्रम संहिता (Labour Codes) हैं। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि ये श्रम संहिता कर्मचारियों के अधिकारों को कमजोर करती हैं, हड़ताल के अधिकार को सीमित करती हैं, काम के घंटे बढ़ाती हैं और श्रम कानून उल्लंघन पर नियोक्ताओं की जवाबदेही कम करती हैं।

प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग में वृद्धि और ठेके पर आधारित रोजगार को भी नौकरी की सुरक्षा और उचित वेतन के लिए खतरा बताया।

हड़ताल के असर के चलते बैंकिंग, बीमा, डाक सेवा, कोयला खनन, औद्योगिक उत्पादन और राज्य परिवहन सेवाओं पर प्रभाव पड़ा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसान रैलियां भी निकाली गईं।

हालांकि, निजी क्षेत्र के कार्यालय, स्कूल, कॉलेज और ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से चालू हैं।

बिहार में अलग विरोध:

बिहार में, जहां विपक्ष मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है, उसने केंद्र की श्रम विरोधी नीतियों को भी निशाना बनाया।

पटना के दानापुर कोर्ट के पास सड़क जाम और टायर जलाए जाने की घटनाएं हुईं। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में हाशिए पर मौजूद वर्गों को बाहर करने की साजिश का आरोप लगाया।

CPI(ML) के विधायक अमरजीत कुशवाहा ने आईएएनएस से कहा,
"हमने बिहार बंद का आह्वान नहीं किया था, लेकिन केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की साजिश को देखते हुए यह बंद स्वतः हो गया है।"

राजद नेता प्रेमचंद उर्फ भोला यादव ने कहा,
"पूरा बिहार आज चुनाव आयोग के खिलाफ बंद मना रहा है। रेलवे, सड़कें, बस स्टैंड सब ठप हैं, जिससे आम जनता को परेशानी हो रही है।"

आरा में, सांसद सुदामा प्रसाद ने हाईवे ब्लॉक किया, जबकि पूर्व विधायक अरुण यादव ने रेलवे स्टेशन से जुलूस निकाला और दुकानदारों से बंद में शामिल होने की अपील की।

अन्य राज्यों में बंद का असर:

ओडिशा के ब्रह्मपुर में ट्रेन रोककर प्रदर्शन हुआ और शहरभर में पिकेटिंग की गई।
बैंक, बीमा और डाक कर्मचारियों ने 11 सूत्रीय मांग पत्र के तहत हड़ताल में हिस्सा लिया।

पश्चिम बंगाल में हावड़ा सहित कई जिलों में बंद को व्यापक समर्थन मिला।
जादवपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों को रोका गया और प्लेटफॉर्म पर नारेबाज़ी की गई।

पुडुचेरी में पूरी तरह बंद रहा, सार्वजनिक परिवहन बंद, बाज़ार बंद और शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहे।
इंडिया गठबंधन और ट्रेड यूनियनों ने 21 सूत्रीय मांग पत्र के साथ बंद का नेतृत्व किया, जिसमें नए श्रम कानूनों की वापसी और युवाओं के लिए रोजगार की मांग शामिल है।

पंजाब में पंजाब रोडवेज, PUNBUS और PRTC के ठेका कर्मचारी 9 से 11 जुलाई तक तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं।
पठानकोट डिपो के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी अपनी मांगों के तत्काल समाधान की मांग कर रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है जब इतनी व्यापक हड़ताल हुई हो।
2020, 2022 और 2024 में भी देशव्यापी हड़तालों में लाखों श्रमिकों ने हिस्सा लिया, जिससे श्रमिक हितैषी नीतियों की मांग और विवादास्पद आर्थिक सुधारों की वापसी की मांग तेज हुई।

 

With inputs from IANS

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