भारतीय बायोटेक कंपनियाँ mRNA आधारित टीकों और उपचारों के विकास में सक्रिय: जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT)By Admin Sat, 17 May 2025 06:41 AM









नई दिल्ली (IANS) — विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने बताया कि भारतीय बायोटेक कंपनियाँ mRNA (मैसेंजर आरएनए) आधारित टीकों और चिकित्सकीय उत्पादों के विकास में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

यह जानकारी DBT और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित "बायोफाउंड्री और बायोमैन्युफैक्चरिंग पहल" पर आधारित 14वें वेबिनार के दौरान दी गई।

इस सत्र का विषय था "mRNA चिकित्सकीय उत्पादों के लिए बायोमैन्युफैक्चरिंग", जो BioE3 (जैव प्रौद्योगिकी: अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार) नीति के तहत एक महत्वपूर्ण उप-क्षेत्र है।

DBT में वरिष्ठ सलाहकार और वैज्ञानिक ‘एच’ डॉ. अल्का शर्मा ने कहा, “BioE3 नीति का उद्देश्य उच्च प्रदर्शन वाली बायोमैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है, जो सतत हरित विकास को समर्थन देती है। यह नीति वैश्विक स्तर पर टिकाऊ विकास की ओर एक बड़ा कदम है, जो 'बायोरिवोल्यूशन' को प्रेरित कर रही है—एक ऐसी क्रांति, जो अर्थव्यवस्थाओं और समाजों का पुनर्रचना कर सकती है।”

उन्होंने यह भी बताया कि यह वेबिनार श्रृंखला का 14वाँ सत्र है, जो mRNA आधारित चिकित्सकीय उत्पादों पर केंद्रित है—जो इस नीति के तहत एक प्रमुख विषयगत उप-क्षेत्र है।

डॉ. शर्मा ने कहा, “कई भारतीय बायोटेक कंपनियाँ और अनुसंधान संस्थान mRNA आधारित टीकों और उपचारों के विकास में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।” साथ ही उन्होंने इस क्षेत्र के सामने मौजूद कुछ चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जैसे कि उत्पाद डिलीवरी, उत्पाद की स्थिरता, और कच्चे माल की आयात पर निर्भरता।

यह BioE3 नीति, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा जारी किया गया, भारत को बायो-आधारित नवाचारों में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर करने का लक्ष्य रखती है।

यह नीति mRNA जैसी सटीक उपचार (Precision Therapeutics) तकनीकों सहित विविध क्षेत्रों में सतत बायोमैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देती है, जिससे आर्थिक विकास के साथ-साथ भारतीय जनसंख्या के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिल सके।

DBT के वैज्ञानिक ‘डी’ डॉ. वर्षनेया सिंह ने mRNA चिकित्सकीय उप-क्षेत्र पर एक सूक्ष्म एवं व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा, “mRNA आधारित उपचार जैव प्रौद्योगिकी में एक क्रांतिकारी प्रगति हैं, जिनसे कैंसर, आनुवंशिक विकारों और संक्रामक रोगों सहित कई प्रकार की बीमारियों से निपटा जा सकता है।”
उन्होंने इस उप-क्षेत्र का SWOT विश्लेषण (ताकत, कमजोरियाँ, अवसर और खतरे) भी प्रस्तुत किया।

आईआईएससी बेंगलुरु के प्रोफेसर डॉ. राघवन वरदराजन ने mRNA-LNP (लिपिड नैनो-पार्टिकल्स) वैक्सीन तकनीक में हो रहे अत्याधुनिक नवाचारों पर चर्चा की। उन्होंने इस तकनीक को आधुनिक चिकित्सा में क्रांतिकारी बताया।

उन्होंने mRNA वैक्सीन डिजाइन प्रक्रिया, इस तकनीक की प्रमुख विशेषताएँ, mRNA की संरचनात्मक विशेषताएँ, LNP तैयार करने की प्रक्रिया, विभिन्न फॉर्म्युलेशनों की तुलनात्मक समीक्षा, माइक्रोफ्लुइडिक चिप्स के प्रकार और निर्माण विधियों की तुलना पर भी विस्तार से जानकारी दी।

यह वेबिनार एक सहयोगात्मक मंच के रूप में उभरा, जिसमें अकादमिक जगत, उद्योग विशेषज्ञों, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं ने mRNA चिकित्सकीय उत्पादों की बायोमैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकासों और उभरते अवसरों पर चर्चा की।

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