भारतीय कोविड वैक्सीन सख्त मानकों और वैश्विक प्रोटोकॉल के तहत विकसित हुई: किरण मजूमदार-शॉBy Admin Thu, 03 July 2025 06:59 AM









नई दिल्ली- कोविड-19 वैक्सीन को लेकर अचानक हो रही मौतों के विवाद के बीच बायोकॉन प्रमुख किरण मजूमदार-शॉ ने गुरुवार को कहा कि भारत में विकसित कोविड वैक्सीन "सख्त प्रोटोकॉल और वैश्विक मानकों के अनुरूप" तैयार की गई हैं।

किरण मजूमदार-शॉ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कोविड वैक्सीन, अन्य सभी टीकों की तरह, कुछ लोगों में साइड इफेक्ट्स पैदा कर सकती हैं, लेकिन उनका दिल का दौरा पड़ने से कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने लिखा, “भारत में विकसित कोविड-19 वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी (ईयूए) के तहत सख्त सुरक्षा और प्रभावशीलता प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, वैश्विक मानकों के अनुसार स्वीकृति मिली थी।”

उनकी यह प्रतिक्रिया कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के उस बयान पर आई है, जिसमें उन्होंने कोविड वैक्सीन के "जल्दबाज़ी में मंजूरी और वितरण" को राज्य के हासन जिले में दिल का दौरा पड़ने से हुई 20 से अधिक मौतों के संभावित कारण के रूप में जोड़ा था।

मजूमदार-शॉ ने कहा, “यह कहना कि इन टीकों को जल्दबाज़ी में मंजूरी दी गई थी, तथ्यात्मक रूप से गलत है और इससे जनता में ग़लत जानकारी फैलती है।”

उन्होंने आगे कहा, “इन टीकों ने लाखों लोगों की जान बचाई है। बाकी सभी टीकों की तरह इनमें से कुछ का असर सीमित संख्या में व्यक्तियों पर साइड इफेक्ट के रूप में हो सकता है। यह ज़रूरी है कि हम इनके विकास के पीछे विज्ञान और डेटा आधारित प्रक्रियाओं को समझें, न कि बिना तथ्यों के आरोप लगाएं।”

उन्होंने यह भी कहा कि हार्ट अटैक के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

उन्होंने लिखा, “वैक्सीन लगवाने के चार साल बाद हार्ट अटैक को कोविड टीकों से जोड़ना तर्कसंगत नहीं है। इसके कई अन्य कारण हो सकते हैं, जैसे परफॉर्मेंस-एनहांसिंग ड्रग्स का इस्तेमाल, अत्यधिक व्यायाम आदि।”

कोविड महामारी के बाद देशभर से हार्ट अटैक से जुड़ी मौतों के मामले, खासतौर पर युवाओं में, सामने आए हैं, जिसके बाद कुछ लोगों ने इसे कोविड टीकों से जोड़ने की कोशिश की।

हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अचानक कार्डियक अरेस्ट की कई वजहें हो सकती हैं, जिनमें अनुवांशिक कारण, जीवनशैली, पहले से मौजूद बीमारियां और कोविड के बाद की जटिलताएं शामिल हैं, लेकिन कोविड वैक्सीन इन मौतों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इन टीकों को सुरक्षित पाया गया है।

आईएएनएस से बात करते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (आईसीएमआर-एनआईई) के निदेशक मनोज मुरहेकर ने कहा कि कोविड टीकाकरण ने वास्तव में अचानक मौतों को रोका, न कि उनका कारण बना।

उन्होंने बताया कि 2023 में आईसीएमआर ने इस मुद्दे पर अध्ययन किया था, जिसमें यह आशंका जताई गई थी कि कोविड टीकाकरण से देश में अचानक मौतें हो रही हैं।

मुरहेकर ने कहा, “हमारे अध्ययन में पाया गया कि कोविड वैक्सीन का अचानक मौतों से कोई संबंध नहीं है। बल्कि, इससे लोगों को अचानक मौतों से बचाव मिला।”

 

With inputs from IANS

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