ट्रंप का बयान: नाटो देशों से रूसी तेल ख़रीद बंद करने की अपील, चीन पर 50-100% टैरिफ़ लगाने की धमकीBy Admin Sun, 14 September 2025 05:50 AM









न्यूयॉर्क - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब नाटो सहयोगियों को खुलकर निशाने पर लिया है और उन पर रूस से तेल ख़रीदने को लेकर नाराज़गी जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नाटो देश मॉस्को से तेल ख़रीदना बंद करते हैं तो वे चीन पर 50 से 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ़ (शुल्क) लगाने का आदेश देंगे।

ट्रंप ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, “यूक्रेन युद्ध को जीतने के लिए नाटो की प्रतिबद्धता सौ प्रतिशत नहीं रही है, और कुछ देशों द्वारा रूसी तेल की ख़रीद बेहद चौंकाने वाली है।”

इससे पहले ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल आयात करने को लेकर 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ़ लगाया था, जो 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क के अतिरिक्त था। जबकि नाटो के कई अन्य देश रूस से तेल और गैस खरीदते हुए भी किसी कार्रवाई से बच निकले।

ट्रंप ने लिखा, “मैं रूस पर बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाने को तैयार हूं, लेकिन तभी जब सभी नाटो देश सहमत हों और रूसी तेल ख़रीदना बंद कर दें।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर नाटो देश रूसी तेल ख़रीदना बंद कर दें और एक समूह के तौर पर चीन पर 50% से 100% टैरिफ़ लगाएं, जिसे युद्ध समाप्त होने के बाद हटा लिया जाएगा, तो यह इस घातक और बेतुके युद्ध को खत्म करने में बड़ी मदद करेगा।”

नाटो देशों को चुनौती देते हुए ट्रंप ने लिखा, “मैं तैयार हूं, जब आप हों। बस बताइए कब।”

उन्होंने चीन की भूमिका पर भी निशाना साधा और कहा कि बीजिंग पर मॉस्को की पकड़ काफी मज़बूत है। “चीन का रूस पर गहरा नियंत्रण है, और ये कड़े टैरिफ़ उस पकड़ को तोड़ देंगे।”

हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का चीन पर भारी दंडात्मक टैरिफ़ लगाने का यह दावा खाली धमकी है, क्योंकि नाटो के कई देश, ख़ासकर तुर्की, अपने रूस व्यापार को रोकने के लिए तैयार नहीं होंगे।

यूरोपीय आयोग के अनुसार, यूरोपीय संघ (ईयू) — जिसके 27 सदस्यों में से 22 नाटो के सदस्य हैं — ने पिछले साल रूस के साथ 79.1 अरब डॉलर का माल व्यापार किया। इसमें से 42.13 अरब डॉलर का आयात हुआ, जिसमें ईंधन की हिस्सेदारी 26.17 अरब डॉलर रही। वहीं, नाटो सदस्य तुर्की का रूस के साथ व्यापार 52.6 अरब डॉलर का था।

इसके विपरीत, भारत का रूस के साथ कुल माल व्यापार पिछले वित्त वर्ष में 68.7 अरब डॉलर रहा, जिसमें आयात का हिस्सा 63.84 अरब डॉलर था।

भारत पर ही विशेष दंडात्मक टैरिफ़ लगाने को लेकर सवाल पूछे जाने पर ट्रंप के नई दिल्ली में राजदूत पद के लिए नामित सर्जियो गोर ने अमेरिकी सीनेट की समिति को चौंकाने वाला जवाब दिया, “सच कहें तो, हम भारत से कभी-कभी अन्य देशों से अधिक उम्मीद रखते हैं।”

ट्रंप ने शुक्रवार को फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में स्वीकार किया कि भारत पर टैरिफ़ लगाने से दोनों देशों के बीच मतभेद पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा, “यह आसान काम नहीं था। यह एक बड़ा कदम था।”

ट्रंप ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर व्यापार वार्ताएं जारी हैं। इस महीने की शुरुआत में उन्होंने कहा था कि भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल वॉशिंगटन आएंगे और अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर से मुलाकात करेंगे।

गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत अब “बारीकियों” (nitty-gritty) तक पहुँच चुकी है।

 

With inputs from IANS

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