सिंधु जल संधि के प्रभाव: अफगानिस्तान के बांध निर्माण कदमों से पाकिस्तान की चिंता बढ़ीBy Admin Fri, 24 October 2025 12:00 PM









काबुल। भारत द्वारा 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को निलंबित करने के कुछ महीनों बाद अब अफगानिस्तान ने कुनार नदी पर बांध बनाने की योजना की घोषणा की है, जिससे इस्लामाबाद की बेचैनी और बढ़ गई है।

तालिबान के उप सूचना मंत्री मुहाजिर फराही ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा, “अमीर-उल-मोमिनीन (तालिबान सर्वोच्च नेता मौलवी हिबतुल्लाह अखुंदजादा) — ईश्वर उनकी रक्षा करें — ने जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि कुनार नदी पर जल्द से जल्द बांधों का निर्माण कार्य शुरू किया जाए और इसके अनुबंध घरेलू कंपनियों के साथ किए जाएं, विदेशी कंपनियों का इंतजार न किया जाए।”

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में दोनों देशों के बीच कई दिनों की झड़पों के बाद एक अस्थायी युद्धविराम कराया गया था।

कुनार नदी, जिसे पाकिस्तान में चितराल नदी के नाम से जाना जाता है, लगभग 480 किलोमीटर लंबी नदी है जो उत्तरी पाकिस्तान और पूर्वी अफगानिस्तान से होकर बहती है।

यह नदी गिलगित-बाल्टिस्तान और चितराल की सीमा पर स्थित चियंतर ग्लेशियर से निकलती है। अरंदू के पास यह अफगानिस्तान में प्रवेश करती है, जहां इसे कुनार नदी कहा जाता है, और आगे चलकर नंगरहार प्रांत में यह काबुल नदी से मिल जाती है। यह नदी प्रणाली हिंदू कुश पर्वतों की बर्फ और ग्लेशियरों से पोषित होती है।

हाल के हफ्तों में दुरंड रेखा पर कई झड़पों के चलते काबुल और इस्लामाबाद के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं।

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की 9 अक्टूबर से शुरू हुई नई दिल्ली यात्रा को पाकिस्तान ने अत्यधिक संदेह की दृष्टि से देखा था। मुत्ताकी की यात्रा के पहले ही दिन काबुल में ड्रोन हमले हुए थे।

पाकिस्तान लंबे समय से तालिबान नेतृत्व पर टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के आतंकवादियों को पनाह देने और मदद करने का आरोप लगाता रहा है। टीटीपी की बढ़ती गतिविधियों से पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है और कई पाकिस्तानी सैनिकों की जान जा चुकी है।

2021 में सत्ता में आने के बाद से तालिबान सरकार ने जल संप्रभुता (Water Sovereignty) को अपनी प्राथमिकता बताया है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों को लेकर कोई औपचारिक समझौता या सहयोग तंत्र मौजूद नहीं है।

इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, “दोनों देशों की सीमा पार करने वाली नौ नदियों में से किसी पर भी साझा जल प्रबंधन के लिए कोई औपचारिक तंत्र या समझौता नहीं है।”

पिछले वर्षों में भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की जल संप्रभुता को लेकर आपत्ति जताई है, और अब कुनार नदी पर बांध निर्माण की योजना से यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है।

 

With inputs from IANS

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