नेतन्याहू से मुलाकात में ट्रंप का सख्त रुख: हमास को जल्द हथियार डालने की चेतावनी, ईरान को भी कड़ा संदेशBy Admin Tue, 30 December 2025 09:12 AM









वॉशिंगटन- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बैठक के दौरान हमास और ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने हमास को “बहुत कम समय” के भीतर निरस्त्रीकरण करने की चेतावनी दी, ईरान को सैन्य क्षमताएं दोबारा विकसित न करने का आगाह किया और अमेरिका-इजरायल की असाधारण रूप से करीबी साझेदारी को दोहराया।

सोमवार को फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा, “हमने हमास और उसके निरस्त्रीकरण पर चर्चा की है और उन्हें बहुत कम समय दिया जाएगा ताकि वे हथियार डाल दें।” उन्होंने दावा किया कि हमास पहले ही इसके लिए सहमत हो चुका है।

ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर वे अपने वादे के अनुसार हथियार नहीं डालते, तो उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्हें एक सीमित समय के भीतर निरस्त्रीकरण करना ही होगा।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई का बोझ केवल इजरायल पर नहीं होगा। ट्रंप ने कहा, “अगर वे कहें कि वे निरस्त्रीकरण नहीं करेंगे, तो वही देश हमास का सफाया कर देंगे। इसके लिए इजरायल की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।”

ट्रंप ने बताया कि मौजूदा शांति ढांचे के समर्थन में 59 देश खड़े हैं। उन्होंने कहा, “59 देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं, बड़े-बड़े देश। यह पश्चिम एशिया में वास्तविक शांति है। हमास इसका एक छोटा हिस्सा है, लेकिन फिर भी एक हिस्सा है।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या हमास के पूरी तरह निरस्त्र होने से पहले इजरायल अपनी सेना हटाएगा, तो ट्रंप ने दोनों मुद्दों को अलग-अलग बताया। उन्होंने कहा, “यह एक अलग विषय है, इस पर बातचीत होगी।”

उन्होंने इस आरोप को भी खारिज किया कि इजरायल शांति योजना के बाद के चरणों को लागू करने में देरी कर रहा है। ट्रंप ने कहा, “उन्होंने योजना का 100 प्रतिशत पालन किया है।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे इजरायल के किसी भी कदम को लेकर चिंता नहीं है। मेरी चिंता इस बात को लेकर है कि दूसरे लोग क्या कर रहे हैं या क्या नहीं कर रहे हैं।”

ट्रंप ने क्षेत्रीय स्थिरता को बार-बार ईरान से जोड़ते हुए चेतावनी दी कि अगर उसने दोबारा सैन्य गतिविधियां शुरू कीं तो कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि वे फिर से सैन्य निर्माण नहीं कर रहे होंगे। अगर वे ऐसा करते हैं, तो हमें बहुत तेजी से उस निर्माण को खत्म करना पड़ेगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि खुफिया जानकारी के अनुसार, पहले हमलों के बाद ईरान वैकल्पिक ठिकानों की तलाश कर सकता है। ट्रंप ने कहा, “पहले वाले ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए थे, लेकिन वे अन्य स्थानों को देख रहे हैं।”

ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर इन रिपोर्टों की पुष्टि हुई तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा, “परिणाम बहुत शक्तिशाली होंगे, शायद पिछली बार से भी ज्यादा।”

हालांकि, ट्रंप ने कूटनीति के लिए दरवाजा खुला होने की बात भी कही। ईरान के साथ द्विपक्षीय बातचीत के सवाल पर उन्होंने कहा, “हां, मैं इसका समर्थन करता हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि वह पहले भी बातचीत का प्रस्ताव दे चुके थे। “मैंने कहा था, बातचीत करते हैं, लेकिन उन्होंने उस पर विश्वास नहीं किया। अब वे मुझ पर विश्वास करते हैं।”

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ट्रंप की नीति और इजरायल के प्रति उनके व्यक्तिगत समर्थन की सराहना की। नेतन्याहू ने कहा, “व्हाइट हाउस में हमें राष्ट्रपति ट्रंप जैसा मित्र कभी नहीं मिला।” उन्होंने अमेरिका-इजरायल सहयोग को “बेजोड़ साझेदारी” बताया।

नेतन्याहू ने यह भी घोषणा की कि इजरायल राष्ट्रपति ट्रंप को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘इजरायल प्राइज’ प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, “हमने एक परंपरा तोड़ने का फैसला किया है। यह पुरस्कार पहले कभी किसी गैर-इजरायली को नहीं दिया गया।” उन्होंने कहा कि ट्रंप को यह सम्मान इजरायल और यहूदी समुदाय के लिए उनके असाधारण योगदान के लिए दिया जाएगा।

ट्रंप ने इस सम्मान को “महान सम्मान” बताया और नेतन्याहू को युद्धकालीन प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि उनके फैसलों ने इजरायल के अस्तित्व को आकार दिया है। ट्रंप ने कहा, “अगर उनकी जगह दस में से आठ अन्य प्रधानमंत्री होते, तो आज इजरायल शायद अस्तित्व में ही नहीं होता।”

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में व्यापक शांति प्रयास ईरान के खिलाफ अमेरिका की पूर्व कार्रवाइयों के कारण संभव हो सके। ट्रंप ने कहा, “अगर हमने ईरान के खिलाफ वह कदम नहीं उठाए होते, तो आज पश्चिम एशिया में शांति नहीं होती।”

सीरिया पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की वहां के नए नेतृत्व के साथ एक “समझ” है। उन्होंने कहा, “मैं उनका सम्मान करता हूं, वह एक मजबूत नेता हैं।” नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की प्राथमिकता सुरक्षा और अल्पसंख्यकों की रक्षा है। उन्होंने कहा, “हम सीरिया के साथ शांतिपूर्ण सीमा चाहते हैं। हम अपने द्रूज़ मित्रों की सुरक्षा करना चाहते हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सीरिया और पूरे पश्चिम एशिया में ईसाइयों की भी रक्षा होनी चाहिए।

लेबनान के संदर्भ में ट्रंप ने कहा कि हिज़्बुल्लाह अब भी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, “हिज़्बुल्लाह का व्यवहार ठीक नहीं रहा है।”

ट्रंप ने कहा कि अब्राहम समझौते का विस्तार होगा और यह प्रक्रिया “काफी तेजी से” आगे बढ़ेगी। पूरे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बल प्रयोग से समर्थित प्रतिरोध नीति पर जोर दिया। ईरान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “अगर वे सैन्य निर्माण करेंगे, तो पश्चिम एशिया में शांति संभव नहीं होगी।”

गौरतलब है कि हमास 2007 से गाजा पट्टी पर शासन कर रहा है और अमेरिका उसे आतंकवादी संगठन मानता है। निरस्त्रीकरण और सुरक्षा गारंटी के मुद्दों पर मतभेदों के चलते अब तक कई युद्धविराम प्रयास विफल रहे हैं।

पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर भारत और भारतीय प्रवासी समुदाय की करीबी नजर रहती है, क्योंकि इस क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हित, ऊर्जा सुरक्षा और लाखों भारतीय नागरिकों की उपस्थिति जुड़ी हुई है।

 

With inputs from IANS

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