अमेरिकी जहाज निर्माण और सैन्य शक्ति बढ़ाने के लिए हेगसेथ ने ‘आर्सेनल ऑफ फ्रीडम’ अभियान शुरू कियाBy Admin Tue, 06 January 2026 07:51 AM









वॉशिंगटन: अमेरिका की सैन्य ताकत और समुद्री क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने एक महीने तक चलने वाले “आर्सेनल ऑफ फ्रीडम टूर” की शुरुआत की। इस पहल के तहत जहाज निर्माण के विस्तार, रक्षा खरीद प्रणाली में व्यापक सुधार और सैन्य शक्ति को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। यह कदम ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिका की ताकत और प्रतिरोधक क्षमता को फिर से स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है।

वर्जीनिया के न्यूपोर्ट न्यूज शिपयार्ड में संबोधन के दौरान हेगसेथ ने कहा कि प्रशासन समुद्री औद्योगिक आधार में तेजी से निवेश करने के लिए तैयार है। उन्होंने शिपयार्ड कर्मचारियों और सेवा में तैनात जवानों को राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ बताते हुए कहा, “हम ताकत के व्यवसाय में हैं। आप भी ताकत के व्यवसाय में हैं।”

हेगसेथ ने कहा कि इस टूर के दौरान वरिष्ठ अधिकारी देशभर के शिपयार्डों और फैक्ट्रियों का दौरा करेंगे, ताकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और सैन्य तैयारियों में हो रहे पुनरुत्थान को उजागर किया जा सके।

उन्होंने बताया कि प्रशासन तीन मूल सिद्धांतों से संचालित है— “अमेरिका और अमेरिकियों को प्राथमिकता,” “ताकत के जरिए शांति,” और अमेरिकी औद्योगिक व सैन्य क्षमता में “नियंत्रित गिरावट” के दौर को पूरी तरह खारिज करना।

हेगसेथ ने कहा, “जो देश खुद चीजें नहीं बना सकता, वह नियंत्रित गिरावट की स्थिति में होता है।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस सोच को खारिज करते हुए “एक महान अमेरिकी पुनर्जागरण” को गति दी है।

युद्ध सचिव ने कहा कि रक्षा विभाग में भर्ती के मोर्चे पर “ऐतिहासिक उछाल” देखा जा रहा है। उन्होंने बताया, “पिछला साल कई दशकों में रिकॉर्ड रहा और इस साल हम पहले से ही उससे आगे हैं।”

प्रशासन की सैन्य प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए हेगसेथ ने कहा कि पहला लक्ष्य सशस्त्र बलों में “योद्धा भावना” को बहाल करना है, जिसमें मानकों, अनुशासन, प्रशिक्षण और मारक क्षमता पर जोर दिया जाएगा। दूसरा लक्ष्य आधुनिक उपकरणों और नेतृत्व के साथ सेना का पुनर्निर्माण है, जिसके लिए हालिया रक्षा बजट में एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक का ऐतिहासिक निवेश किया गया है। तीसरा लक्ष्य इतना मजबूत प्रतिरोध स्थापित करना है कि कोई भी प्रतिद्वंद्वी अमेरिका को चुनौती देने की हिम्मत न करे।

हेगसेथ ने पिछली सरकार की वैश्विक संघर्षों से निपटने की नीति की आलोचना करते हुए अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी और मध्य पूर्व व यूक्रेन के युद्धों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी ताकत पर सवाल उठने लगे थे। “दुनिया सोचने लगी थी कि क्या अमेरिका वाकई मजबूत है और नेतृत्व कर सकता है। अब वह दौर खत्म हो चुका है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने हूती विद्रोहियों, ईरान और मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क के खिलाफ हालिया अमेरिकी कार्रवाइयों को मजबूत प्रतिरोध के उदाहरण के रूप में पेश किया। वेनेजुएला में हुए एक हालिया अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कराकस में अमेरिकी बलों ने अमेरिकी एजेंसियों को वांछित एक व्यक्ति को “बिना किसी अमेरिकी के हताहत हुए” हिरासत में लिया।

अपने भाषण में हेगसेथ ने प्रशासन द्वारा हाल ही में घोषित “गोल्डन फ्लीट” पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे नौसेना के जहाज निर्माण को पुनर्जीवित करने और समुद्री वर्चस्व बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा निवेश बताया। इस योजना के तहत “ट्रंप-क्लास बैटलशिप्स” की नई पीढ़ी और पनडुब्बियों के उत्पादन में विस्तार शामिल है।

उन्होंने कहा, “यह नया युद्ध बेड़ा दुनिया के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि समुद्रों पर हमारा नियंत्रण गैर-परक्राम्य है और रहेगा।”

हेगसेथ ने रक्षा ठेकेदारी प्रणाली में सुधार की बात करते हुए चेतावनी दी कि अब देरी और लागत बढ़ोतरी को पुरस्कृत नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “देरी और लागत बढ़ाने को इनाम देने का दौर खत्म हो चुका है। अब उन्हीं कंपनियों को तरजीह दी जाएगी, जो समय पर और तय बजट में काम पूरा करें।”

उन्होंने शिपयार्ड कर्मियों से कहा कि उनकी भूमिका अमेरिकी नाविकों की सुरक्षा और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ी है। “आपके बिना हमारे योद्धा जीत नहीं सकते। हम इस लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर साथ हैं,” उन्होंने कहा।

हंटिंगटन इंगॉल्स इंडस्ट्रीज़ द्वारा संचालित न्यूपोर्ट न्यूज शिपयार्ड अमेरिका की एकमात्र ऐसी सुविधा है, जहां परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत बनाए जाते हैं, और यह नौसेना के लिए परमाणु पनडुब्बियां बनाने वाली दो इकाइयों में से एक है।

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि घरेलू विनिर्माण और जहाज निर्माण को पुनर्जीवित करना बेहद जरूरी है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका को चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिसने हाल के वर्षों में अपनी नौसैनिक शक्ति का तेजी से विस्तार किया है।

 

With inputs from IANS

ADVERTISEMENT
Advertisement
ADVERTISEMENT
Advertisement

ADVERTISEMENT
Advertisement

ADVERTISEMENT
Advertisement
ADVERTISEMENT
Advertisement