ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में सदस्यता शुल्क नहीं होगा: अमेरिकी अधिकारीBy Admin Wed, 21 January 2026 06:27 AM









वॉशिंगटन- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए किसी भी देश को न तो प्रवेश शुल्क देना होगा और न ही कोई अनिवार्य सदस्यता शुल्क चुकाना पड़ेगा। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए इस पहल के संचालन को लेकर उठ रहे सवालों को स्पष्ट करने की कोशिश की है।

जब यह पूछा गया कि क्या रिपोर्ट में सामने आया एक अरब डॉलर का आंकड़ा किसी तरह की ‘बाय-इन’ राशि है, तो अधिकारी ने इसका खंडन किया। उन्होंने कहा, “नहीं। जो देश परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान देना चाहते हैं और उचित निगरानी बनाए रखना चाहते हैं, वे इसमें जुड़े रह सकते हैं।” अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर यह बात कही।

अधिकारी ने साफ किया कि केवल सदस्यता लेने से किसी तरह का भुगतान करना अनिवार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा, “नहीं। सदस्यता के साथ कोई अनिवार्य वित्तीय दायित्व नहीं जुड़ा है। कोई भी देश या भागीदार अपनी इच्छा से ही योगदान देगा।”

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने संघर्षों के समाधान और युद्धों को रोकने के लिए एक नए मंच के रूप में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का विचार सामने रखा है। इस प्रस्ताव को लेकर कई देशों के मन में लागत, शासन व्यवस्था और निगरानी से जुड़े सवाल उठ रहे थे।

वित्तीय प्रबंधन को लेकर अधिकारी ने कहा कि इस व्यवस्था में कड़े नियंत्रण लागू किए जाएंगे। उन्होंने बताया, “बोर्ड में सर्वोच्च स्तर की वित्तीय निगरानी और नियंत्रण प्रणाली लागू की जाएगी।”

अधिकारी के अनुसार, सभी धनराशि केवल प्रतिष्ठित बैंकों के स्वीकृत खातों में रखी जाएगी। किसी भी भुगतान से पहले मुख्य वित्तीय अधिकारी द्वारा जांच-पड़ताल और कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी होगी। भुगतान के लिए कई हस्ताक्षरों की आवश्यकता होगी और ‘नो योर कस्टमर’ (केवाईसी), एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (एएमएल) तथा प्रतिबंधों से संबंधित जांच भी की जाएगी।

उन्होंने कहा, “हर भुगतान के लिए तय बहु-हस्ताक्षर प्रक्रिया, केवाईसी/एएमएल और प्रतिबंध जांच तथा संबंधित दस्तावेज जरूरी होंगे।”

अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि निगरानी केवल आंतरिक स्तर पर सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने बताया, “ऑडिट और जोखिम उप-समिति के जरिए निगरानी की जाएगी और हर साल स्वतंत्र बाहरी ऑडिट होगा, जिसकी वित्तीय रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।”

प्रस्तावित बोर्ड के नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठे, खासकर यह कि क्या ट्रंप अनिश्चितकाल तक इसके अध्यक्ष बने रहेंगे या यह पद स्वतः भविष्य के अमेरिकी राष्ट्रपतियों को सौंप दिया जाएगा।

इस पर अधिकारी ने कहा, “अध्यक्ष पद राष्ट्रपति ट्रंप तब तक संभाल सकते हैं, जब तक वह स्वयं इसे छोड़ नहीं देते।”

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह भूमिका स्थायी रूप से व्हाइट हाउस में बैठे व्यक्ति से नहीं जुड़ी होगी। अधिकारी के अनुसार, “भविष्य का कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति बोर्ड में अमेरिका के प्रतिनिधि की नियुक्ति या नामांकन का फैसला कर सकता है।”

इन जवाबों का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ किसी शुल्क-आधारित संगठन की तरह काम नहीं करेगा और न ही इसमें शामिल देशों पर कोई बाध्यकारी वित्तीय जिम्मेदारी डाली जाएगी। जोर स्वैच्छिक योगदान और साझा निगरानी पर रहेगा।

ऑडिट की अनिवार्यता और बैंकिंग सुरक्षा उपायों का खाका पेश कर अधिकारी ने संभावित साझेदारों को आश्वस्त करने की कोशिश की कि धन का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होगा और वार्षिक ऑडिट के जरिए इसकी सार्वजनिक जानकारी दी जाएगी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को ऐसा मंच बताया है, जहां नेता सीधे बैठकर विवादों का समाधान कर सकते हैं। उनका कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अक्सर युद्ध रोकने में धीमी या प्रभावी नहीं साबित हुई हैं।

 

With inputs from IANS

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