सुरक्षित निवेश की मांग के बीच इस हफ्ते सोने का कारोबार सीमित दायरे में, रुझान सकारात्मकBy Admin Sun, 21 September 2025 05:39 AM









नई दिल्ली- भारतीय बुलियन बाज़ार में इस हफ्ते सोने की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। 16 सितम्बर को रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद आई गिरावट के बावजूद, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल और दर कटौती के संकेत देने से सोने को सहारा मिला।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) इस हफ्ते सोमवार को ₹1,09,603 पर खुला, मंगलवार को ₹1,10,540 के उच्च स्तर तक पहुंचा और सप्ताहांत पर ₹1,09,873 पर बंद हुआ।

विश्लेषकों के मुताबिक, “सोना सीमित दायरे में लेकिन सकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता रहा, जहां डॉलर में 0.38% और रुपये में 0.26% की बढ़त दर्ज की गई। फेड की नीतियों ने हालिया दर कटौती का समर्थन किया है और आने वाले आंकड़ों के आधार पर दो और कटौती की संभावना भी खुली रखी है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि अब निवेशकों की नज़र अगले हफ्ते आने वाले अहम अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों—जीडीपी, मैन्युफैक्चरिंग व सर्विसेज पीएमआई और पीसीई प्राइस इंडेक्स—पर रहेगी, जो आगे की दिशा तय करेंगे। सोना ₹1,07,500 से ₹1,11,000 के दायरे में कारोबार कर सकता है।

17 सितम्बर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की स्पॉट कीमत $3,683 प्रति औंस तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है और इस साल 43% की उछाल दर्शाता है। वहीं घरेलू बाजार में एमसीएक्स अक्टूबर फ्यूचर्स ₹1,10,138 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड हुए।

अमेरिकी श्रम बाजार के नरम पड़ने और फेड के हालिया नरम रुख से सोने को थामे रखने की लागत घटी है, जिससे जोखिम से बचने वाले निवेशक बुलियन की ओर आकर्षित हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एशियाई देशों के केंद्रीय बैंक डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। वहीं, मध्य-पूर्व तनाव और अमेरिका-चीन व्यापार विवाद जैसे भू-राजनीतिक कारणों ने भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर खींचा है।

हालांकि, विश्लेषकों ने चेताया है कि यह तेजी ज़्यादा खिंच सकती है, जैसे 2011 में सोना रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद लंबे समय तक गिरावट में चला गया था।

ट्रेडर्स अब अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर ध्यान देंगे, जबकि भारतीय उपभोक्ता और ज्वैलर्स की नज़र घरेलू त्योहारी मांग पर टिकी रहेगी।

 

With inputs from IANS

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