सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के बीच चांदी ने रचा इतिहास, दाम $52.50 प्रति औंस के पारBy Admin Tue, 14 October 2025 05:58 AM









मुंबई- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ती रुचि और लंदन बाजार में ऐतिहासिक शॉर्ट स्क्वीज़ के चलते मंगलवार को चांदी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। चांदी की कीमत $52.50 प्रति औंस के पार चली गई, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है।

लंदन में स्पॉट सिल्वर 0.4 प्रतिशत बढ़कर $52.58 प्रति औंस पर पहुंची, जिसने जनवरी 1980 का पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया। उस समय अरबपति हंट भाइयों ने बाजार पर नियंत्रण करने की कोशिश की थी।

सोने की कीमतों में भी उछाल जारी रहा, जिसने लगातार आठवें सप्ताह नई ऊंचाई छुई। यह बढ़त मुख्यतः भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों से प्रेरित रही।

लंदन बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) को लेकर चिंताओं ने चांदी में तेजी को और बढ़ा दिया है। इस वजह से विश्वभर में धातु को सुरक्षित करने की होड़ मच गई है।

वर्तमान में लंदन में चांदी की कीमतें न्यूयॉर्क की तुलना में दुर्लभ प्रीमियम पर कारोबार कर रही हैं। इस मूल्य अंतर का फायदा उठाने के लिए व्यापारी अब चांदी की सिल्लियां हवाई मार्ग से अटलांटिक पार भेज रहे हैं — जो आमतौर पर सिर्फ सोने के लिए किया जाता है।

मंगलवार को यह प्रीमियम लगभग $1.55 प्रति औंस था, जो पिछले सप्ताह $3 था।

इसके साथ ही लंदन में सिल्वर लीज़ रेट्स (धातु उधार लेने की लागत) पिछले शुक्रवार को एक महीने के अनुबंधों के लिए 30 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गईं, जिससे शॉर्ट पोजिशन बनाए रखना व्यापारियों के लिए बेहद महंगा हो गया है।

स्थिति तब और तंग हो गई जब भारत से मजबूत मांग के कारण वैश्विक आपूर्ति और घट गई। इससे पहले अमेरिकी टैरिफ की आशंकाओं के चलते बड़ी मात्रा में शिपमेंट न्यूयॉर्क भेजी गई थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी दोनों में यह तेज़ी निवेशकों की बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाती है।

सोने की कीमतें इस साल अब तक लगभग 60 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं और पहली बार $4,100 के पार पहुंची हैं। यह उछाल भू-राजनीतिक तनाव, ब्याज दरों में कटौती की अटकलों और केंद्रीय बैंकों व निवेशकों की आक्रामक खरीद से प्रेरित है।

इस सप्ताह अमेरिका के महत्त्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े — जैसे मुद्रास्फीति और खुदरा बिक्री — जारी होने वाले हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारी शटडाउन जारी रहा, तो इन रिपोर्टों, जिसमें रोजगार के आंकड़े भी शामिल हैं, के जारी होने में देरी हो सकती है।

 

With inputs from IANS

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