वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4-6.5 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना: एसबीआई रिपोर्टBy Admin Wed, 21 May 2025 06:12 AM









नई दिल्ली: वैश्विक अस्थिरताओं के प्रभाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है और वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 6.4 से 6.5 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है। यह जानकारी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिपोर्ट में बुधवार को दी गई।

एसबीआई के आर्थिक अनुसंधान विभाग ने जीडीपी का सांख्यिकीय अनुमान लगाने के लिए एक ‘नाउकास्टिंग मॉडल’ विकसित किया है, जिसमें उद्योग, सेवा क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े 36 उच्च आवृत्ति संकेतकों (high frequency indicators) को शामिल किया गया है।

यह मॉडल डायनामिक फैक्टर मॉडल का उपयोग कर FY13 की चौथी तिमाही से FY23 की दूसरी तिमाही तक के डेटा का विश्लेषण करता है, ताकि इन संकेतकों से एक साझा या प्रतिनिधिक संकेत निकाला जा सके।

एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा,

“हमारे ‘नाउकास्टिंग मॉडल’ के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही के लिए अनुमानित जीडीपी वृद्धि दर लगभग 6.4-6.5 प्रतिशत होनी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि NSO द्वारा Q1 से Q3 के आंकड़ों में कोई बड़ा संशोधन नहीं होता, तो पूरे वर्ष की जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में भारतीय मौसम विभाग (IMD) के हवाले से बताया गया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 4-5 दिनों में केरल पहुंचेगा, जो 1 जून की सामान्य तिथि से पहले है। यदि ऐसा होता है, तो यह 2009 के बाद भारत में मानसून की सबसे जल्दी शुरुआत होगी, जब मानसून 23 मई को पहुंचा था।

खरीफ सत्र (2025-26) के लिए भारत ने 354.64 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जो बेहतर मानसून की संभावना के आधार पर तय किया गया है। 2024-25 में यह लक्ष्य 341.55 मिलियन टन था, जिसमें अब तक 332.3 मिलियन टन उत्पादन हुआ है।

घरेलू सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर रिपोर्ट कहती है कि

“महंगाई को लेकर घरों की मौजूदा अपेक्षाओं में नरमी दिख रही है, जिससे विवेकाधीन खर्च बढ़ रहा है और इससे मांग-आधारित वृद्धि को बल मिल रहा है। हालांकि उपभोक्ता विश्वास में स्थिरता यह दर्शाती है कि वैश्विक घटनाक्रमों और आर्थिक संभावनाओं को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे अल्पकालिक स्थिर विकास को लेकर कुछ हद तक सतर्कता दिखाई देती है।”

इसके साथ ही, व्यापारिक तनावों में तीव्र वृद्धि और नीतिगत अनिश्चितताओं के उच्च स्तर का वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। आईएमएफ (IMF) के अनुसार, वैश्विक वृद्धि दर 2025 में घटकर 2.8% और 2026 में 3% रह सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि

“भारत के लिए आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं अपेक्षाकृत स्थिर हैं, जहां FY25 में 6.2% और FY26 में 6.3% वृद्धि की संभावना है। यह दर पहले के अनुमानों से लगभग 30 बेसिस प्वाइंट कम है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक व्यापार तनाव और बढ़ती अनिश्चितताएं हैं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में निजी उपभोग इस वृद्धि को समर्थन देने में अहम भूमिका निभा रहा है।”

 

With inputs from IANS

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