अच्छा मानसून बढ़ाएगा कृषि उत्पादन, महंगाई रहेगी काबू में: रिपोर्टBy Admin Wed, 28 May 2025 10:16 AM









नई दिल्ली: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए अनुमान के अनुसार, इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) सामान्य से बेहतर रहने की संभावना है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि यह पूर्वानुमान सटीक बैठता है, तो इससे कृषि उत्पादन में मजबूती आएगी, ग्रामीण मांग को बल मिलेगा और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।

आईएमडी ने इस वर्ष मानसून के दौरान औसत से 106 प्रतिशत वर्षा का अनुमान जताया है, जो लगातार दूसरे वर्ष सामान्य से अधिक मानसून होगा। रिपोर्ट के अनुसार, "यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है, तो अर्थव्यवस्था को एक और वर्ष अच्छा कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग में सुधार और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण जैसी सकारात्मक स्थितियां मिल सकती हैं।"

वित्त वर्ष 2025 में कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले एक दशक (2015-2024) की औसत 4.0 प्रतिशत वृद्धि से अधिक है। साथ ही, मार्च तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई दर में तीव्र गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण बेहतर खाद्य आपूर्ति था। अप्रैल 2025 में यह घटकर 3.2 प्रतिशत पर आ गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि बारिश अनुमान के अनुरूप रहती है, तो ये सकारात्मक रुझान आगे भी बने रह सकते हैं।

संतुलित कृषि वृद्धि के लिए समयानुसार और क्षेत्रीय स्तर पर वर्षा का समान वितरण अत्यंत आवश्यक है। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, जून माह में पूरे देश में औसत से अधिक वर्षा (108 प्रतिशत से अधिक) की संभावना है। यह बीते तीन वर्षों के विपरीत है, जब जून में कम बारिश हुई थी। इससे बुआई गतिविधियों और जल संसाधनों के पुनर्भरण में सहायता मिलेगी।

आईएमडी का कहना है कि मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सबसे अधिक वर्षा होने की संभावना है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य बारिश की उम्मीद है। केवल उत्तर-पूर्व भारत में औसत से कम वर्षा की आशंका है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अत्यधिक, अपर्याप्त या असमय वर्षा, लू, चक्रवात और बाढ़ जैसे प्रतिकूल जलवायु कारकों पर भी सतर्क निगरानी की आवश्यकता है। उदाहरण के तौर पर, वित्त वर्ष 2025 में पर्याप्त वर्षा के चलते अनाज उत्पादन और महंगाई पर नियंत्रण बना रहा, लेकिन सब्जियों की पैदावार मौसम की मार से प्रभावित हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वर्ष खाद्य महंगाई का लगभग 41 प्रतिशत हिस्सा सब्जियों की कीमतों में वृद्धि के कारण था, जो लू और अत्यधिक वर्षा जैसे प्रतिकूल मौसमीय कारणों से उत्पन्न हुआ।

 

With inputs from IANS

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