अमेरिका-ईरान शांति समझौते से शेयर बाजार में उत्साह, सेंसेक्स 736 अंक उछलाBy Admin Mon, 15 June 2026 05:01 PM







मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना, जिसका असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। निवेशकों की खरीदारी के दम पर प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी मजबूती के साथ बंद हुए।

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 736.38 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,264.33 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 231 अंक यानी 0.98 प्रतिशत चढ़कर 23,853.90 अंक पर पहुंच गया।

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बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर निकट अवधि में एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है। दूसरी ओर, 23,800 का स्तर तत्काल समर्थन माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि निफ्टी इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो बाजार में सकारात्मक रुख कायम रह सकता है।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों में ट्रेंट, श्रीराम फाइनेंस और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल रहे। इन शेयरों में दिनभर निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी देखने को मिली।

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व्यापक बाजारों में भी तेजी का माहौल रहा। निफ्टी मिडकैप सूचकांक 1.29 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक 1.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।

क्षेत्रीय सूचकांकों में रियल्टी सेक्टर ने सबसे शानदार प्रदर्शन किया। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, क्योंकि निवेशकों ने घरेलू खपत आधारित क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया।

हालांकि, फार्मा सेक्टर बाजार की इस तेजी में पीछे रह गया। निफ्टी फार्मा इंडेक्स दिन का सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल सूचकांक रहा।

बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों ने पश्चिम एशिया में पिछले चार महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई है। इससे क्षेत्र में स्थिरता बढ़ने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में संभावित व्यवधान की आशंकाएं कम हुई हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और उन्होंने जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख किया है। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता की उम्मीद भी मजबूत हुई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की आय के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।
 

 

With inputs from IANS

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