घरेलू बाजार में कीमतें घटाने के लिए केंद्र सरकार ने कच्चे खाद्य तेलों पर कस्टम ड्यूटी घटाईBy Admin Thu, 12 June 2025 03:25 AM









नई दिल्ली — केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कच्चे खाद्य तेलों जैसे कच्चा सूरजमुखी तेल, सोयाबीन तेल और पाम तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20% से घटाकर 10% कर दिया है। यह जानकारी उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।

इस कस्टम ड्यूटी में कटौती के कारण अब कच्चे और परिष्कृत (refined) खाद्य तेलों के बीच आयात शुल्क का अंतर 8.75% से बढ़कर 19.25% हो गया है। इससे देश में खाद्य तेलों की रिफाइनिंग क्षमता के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और परिष्कृत तेलों के आयात में कमी आएगी।

बयान में कहा गया है,

“यह कदम सितंबर 2024 में ड्यूटी बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में वृद्धि के चलते खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों से निपटने के उद्देश्य से उठाया गया है। सभी तेल उद्योग संघों और संबंधित पक्षों को सलाह दी गई है कि ड्यूटी में की गई इस कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।”

खाद्य तेलों पर आयात शुल्क वह महत्वपूर्ण कारक है जो इनके लैंडेड कॉस्ट और अंततः घरेलू खुदरा कीमतों को प्रभावित करता है। कच्चे तेलों पर आयात शुल्क घटाकर सरकार उपभोक्ताओं को राहत देना चाहती है और समग्र महंगाई पर नियंत्रण पाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

इसके साथ ही यह नीति घरेलू तेल रिफाइनिंग उद्योग को मजबूती देने, किसानों को उचित मूल्य दिलाने और परिष्कृत तेल के बजाय कच्चे तेल के आयात को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है। विशेष रूप से कच्चे पाम तेल की मांग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे घरेलू रिफाइनिंग क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी।

इस संदर्भ में खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में प्रमुख खाद्य तेल उद्योग संघों और कंपनियों के साथ बैठक आयोजित की गई, जिसमें यह सलाह दी गई कि वे तुरंत उपभोक्ताओं को लाभ देने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर स्तर (PTD) और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) को घटाएं।

तेल उद्योग संघों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने सदस्यों को तुरंत कीमतों में कटौती लागू करने की सलाह दें और हर सप्ताह ब्रांड-वार संशोधित MRP की जानकारी विभाग के साथ साझा करें। इसके लिए मंत्रालय ने एक निर्धारित प्रारूप भी उद्योग के साथ साझा किया है।

बयान के अनुसार,

“इस लाभ को समय पर आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि उपभोक्ताओं को खुदरा कीमतों में वास्तविक कमी महसूस हो सके।”

यह निर्णय बीते वर्ष ड्यूटी बढ़ोतरी के बाद खाद्य तेलों की कीमतों में आई तेज वृद्धि की विस्तृत समीक्षा के बाद लिया गया है। उस वृद्धि के कारण उपभोक्ताओं पर महंगाई का गंभीर बोझ पड़ा था और खाद्य मुद्रास्फीति में भी इजाफा हुआ था।

 

With inputs from IANS

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