केंद्र सरकार ने 35 आवश्यक दवाओं की कीमतों में की कटौतीBy Admin Sun, 03 August 2025 11:06 AM









नई दिल्ली- मरीजों के लिए दवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने प्रमुख फार्मा कंपनियों द्वारा बेची जा रही 35 आवश्यक दवाओं की खुदरा कीमतों में कटौती की है।

कीमत में कटौती की गई दवाओं में सूजनरोधी, हृदय रोग, एंटीबायोटिक, मधुमेह और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं शामिल हैं।

रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने NPPA द्वारा निर्धारित मूल्य नियंत्रण के आधार पर यह अधिसूचना जारी की है। विभिन्न दवाओं की कीमतों में की गई यह कटौती विशेष रूप से दीर्घकालिक रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए राहतकारी मानी जा रही है।

इस मूल्य नियंत्रण आदेश के तहत ऐसेल्क्लोफेनाक, पेरासिटामोल और ट्रिप्सिन-काइमोट्रिप्सिन, एमॉक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लेवुलेनेट, एटोरवास्टेटिन संयोजन, और एंपाग्लिफ्लोज़िन, सिटाग्लिप्टिन और मेटफॉर्मिन जैसी नई मौखिक एंटी-डायबिटिक दवाओं के संयोजन शामिल हैं।

उदाहरण के लिए, डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेट्रीज़ द्वारा विपणन की जा रही और अकुम्स ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स द्वारा निर्मित ऐसेल्क्लोफेनाक-पेरासिटामोल-ट्रिप्सिन काइमोट्रिप्सिन की एक टैबलेट की कीमत अब ₹13 तय की गई है, जबकि कैडिला फार्मास्यूटिकल्स द्वारा इसी संयोजन की टैबलेट की कीमत ₹15.01 होगी।

इसी तरह, एटोरवास्टेटिन 40 मिग्रा और क्लोपिडोग्रेल 75 मिग्रा युक्त टैबलेट, जो हृदय रोगों में व्यापक रूप से उपयोग होती है, की कीमत ₹25.61 निर्धारित की गई है।

बच्चों के लिए मौखिक सस्पेंशन, जैसे कि सेफिक्सिम और पेरासिटामोल के संयोजन, विटामिन D की खुराक के लिए कोलेकैल्सिफेरॉल ड्रॉप्स, और डाइक्लोफेनाक इंजेक्शन (जिसकी कीमत ₹31.77 प्रति मि.ली.) जैसी महत्वपूर्ण दवाएं भी इस सूची में शामिल हैं।

सरकारी आदेश में कहा गया है कि रिटेलर्स और डीलर्स को नई कीमतों की सूची अपनी दुकानों पर प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करनी होगी। निर्धारित कीमतों का पालन नहीं करने पर DPCO, 2013 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें ब्याज सहित वसूली भी शामिल है।

NPPA ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित कीमतों में GST शामिल नहीं है, और लागू होने पर इसे जोड़ा जा सकता है। सभी निर्माताओं को अद्यतन मूल्य सूची फॉर्म-V में ‘इंटीग्रेटेड फार्मास्युटिकल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम’ के माध्यम से NPPA और राज्य औषधि नियंत्रकों को भेजनी होगी।

इस अधिसूचना के तहत संबंधित दवाओं और निर्माताओं के लिए पूर्व में जारी सभी मूल्य आदेश अब अमान्य हो गए हैं।

गौरतलब है कि NPPA, जो रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत काम करता है, देश में औषधियों की कीमतों को नियंत्रित करने, संशोधित करने और निगरानी रखने की जिम्मेदारी निभाता है।

 

With inputs from IANS

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