
रांची: JSSC CGL को लेकर चल रहे विवाद के बीच चयनित अभ्यर्थियों ने शनिवार को प्रेस वार्ता कर अपना पक्ष सामने रखा। अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा पास करने और नौकरी हासिल करने के लिए उन्होंने लंबे समय तक मेहनत की है, लेकिन अब पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने से उनकी परेशानी बढ़ गई है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन पर 35 से 40 लाख रुपये देकर नौकरी हासिल करने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि चयनित अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। उनके लिए इतनी बड़ी रकम देकर नौकरी हासिल करना संभव ही नहीं है।
अभ्यर्थियों ने साफ कहा कि वे किसी भी तरह की जांच के खिलाफ नहीं हैं। अगर परीक्षा या नियुक्ति में कहीं गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो लोग दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो। लेकिन कुछ लोगों पर लगे आरोपों के आधार पर पूरी परीक्षा रद्द करना या सभी चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी खत्म कर देना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच CID कर रही है और मामला अदालत में भी चल रहा है। ऐसे में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही आगे का फैसला लिया जाना चाहिए। अभ्यर्थियों की मांग है कि दोषियों की पहचान कर कार्रवाई हो, लेकिन जिनका कोई दोष सामने नहीं आया है, उन्हें सिर्फ आरोपों के आधार पर सजा नहीं मिलनी चाहिए।
इस दौरान एक अभ्यर्थी अपनी बात रखते हुए भावुक हो गया। उसने बताया कि वह आदिवासी और गरीब परिवार से आता है। उसकी मां घर पर रहती हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह 35-40 लाख रुपये देकर नौकरी हासिल कर सके। उसने बताया कि JSSC CGL में चयन होने के बाद उसने ITBP की नौकरी तक छोड़ दी थी। अब अगर यह नौकरी भी चली जाती है, तो उसके सामने भविष्य को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि वे जांच का स्वागत करते हैं, लेकिन उनकी मांग है कि कार्रवाई सिर्फ उन्हीं लोगों पर हो, जिनकी गलती साबित हो। बिना दोष साबित हुए हजारों चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी रद्द करना उनके साथ अन्याय होगा।