आंवला और सहजन से बदल रही गांवों की तस्वीर, पोषण के साथ बढ़ रहे रोजगार के अवसर: पीएम मोदीBy IANS Sun, 27 September 2026 12:39 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आंवला और सहजन जैसे पारंपरिक खाद्य उत्पादों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण अभियान से जोड़ते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से किसानों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्यमियों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आंवला भारतीय परिवारों में लंबे समय से अचार, मुरब्बा, जूस और सर्दियों में च्यवनप्राश जैसे उत्पादों का अहम हिस्सा रहा है। अब यही पारंपरिक फल ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसंस्करण और छोटे कारोबार के जरिए महिलाओं और किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम बन रहा है।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल के तहत आंवला आधारित कारोबार को नई गति मिली है। जिले में करीब 100 स्थानीय इकाइयां आंवला प्रसंस्करण से जुड़ी हैं और इनमें महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

पीएम मोदी ने देवगढ़ कमासी गांव के ‘सावित्री फुले स्वयं सहायता समूह’ का उल्लेख करते हुए बताया कि समूह की महिलाएं आंवला कैंडी, मुरब्बा और जूस तैयार करती हैं। बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने से समूह की सदस्यों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

इसी तरह ‘विंध्यवासिनी स्वयं सहायता समूह’ आंवले का अचार और पाचक पाउडर तैयार करता है। समूह की महिलाओं को प्रसंस्करण मशीनरी, ऋण की सुविधा और स्थानीय व्यापार मेलों में उत्पाद बेचने के अवसर मिले, जिससे उनकी कमाई बढ़ी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में विशिष्ट फल, पारंपरिक उत्पाद, कला और स्थानीय कौशल मौजूद हैं। ओडीओपी का उद्देश्य ऐसे उत्पादों को स्थानीय बाजार से निकालकर देश के दूसरे हिस्सों और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना है। इससे ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी मजबूती मिलती है और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।

उन्होंने आगामी त्योहारों के मौसम का जिक्र करते हुए लोगों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को आगे बढ़ाने की अपील की।

पोषण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने सितंबर महीने में देश के विभिन्न राज्यों में चलाए जा रहे अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में ‘हर घर मुंगा’ अभियान के जरिए परिवारों को सहजन, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘मुंगा’ कहा जाता है, को रोजमर्रा के भोजन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

गुजरात में ‘वांगी स्पर्धा’ के माध्यम से बाजरा और अन्य स्थानीय पौष्टिक सामग्री से बने व्यंजनों को बढ़ावा दिया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस पहल में दो लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। महाराष्ट्र में भी पोषण केंद्रित अभियानों में स्थानीय भागीदारी बढ़ रही है।

मिजोरम में ‘पोषण वाटिकाओं’ की देखभाल और रखरखाव के लिए सामूहिक अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे प्रयास स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को लोगों की रोजमर्रा की खान-पान की आदतों से जोड़ने में मदद कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि इन पहलों के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों को डिजिटल रूप से भी मजबूत किया जा रहा है। लगभग नौ करोड़ लाभार्थी आंगनवाड़ी व्यवस्था से पंजीकृत हैं, जिससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं तक पोषण एवं देखभाल संबंधी सेवाओं को बेहतर तरीके से पहुंचाने में मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए महंगे खाद्य उत्पादों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय स्तर पर उपलब्ध, सस्ते और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देना जरूरी है। आंवला और सहजन जैसे पारंपरिक ‘सुपरफूड’ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।