लैंड फॉर जॉब केस: लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, FIR रद्द करने की याचिका खारिजBy Admin Mon, 13 April 2026 12:33 PM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को  ‘लैंड फॉर जॉब’ केस में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका लगा है।सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव की एफआईआर रद्द करने की याचक को खारिज कर दिया है।  जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने लालू यादव तथा उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर और संबंधित कार्यवाही रद्द करने की याचिका खारिज कर दी. हालांकि, कोर्ट ने राहत देते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव को ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत रूप से ट्रायल कोर्ट में पेश होने की जरूरत नहीं होगी. दिल्ली हाई कोर्ट के मार्च 2026 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया. इस फैसले से लालू यादव और उनके परिवार पर मुकदमे की कार्यवाही जारी रहेगी. 
क्या है लैंड फॉर जॉब केस
लैंड फॉर जॉब घोटाला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए (2004-2009) पश्चिम मध्य रेलवे (जबलपुर) में ग्रुप-डी भर्ती से जुड़ा है. सीबीआई के अनुसार, उम्मीदवारों के परिवारों से जमीन खरीदकर या हस्तांतरित करवाकर बदले में नौकरियां दी गईं. मई 2022 में दर्ज एफआईआर में लालू, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य परिवारजनों समेत कई आरोपियों का नाम है. तीन चार्जशीट (2022, 2023 और 2024) दाखिल हो चुकी हैं. केस में कुल 34 से ज्यादा आरोपी हैं और कई संपत्तियों को जब्त भी किया जा चुका है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने मार्च में खारिज की थी याचिका 
मार्च 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस रविंदर डुडेजा ने लालू यादव की याचिका खारिज कर दी थी. लालू ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 17-A का हवाला देते हुए दावा किया था कि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के जांच शुरू नहीं हो सकती. हाई कोर्ट ने याचिका को ‘devoid of merit’ बताते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया अपराध बनता है, इसलिए एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने का कोई आधार नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. बेंच ने कहा कि मामले में गंभीर आरोप हैं और ट्रायल को बिना रुकावट आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए. हालांकि, स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लालू यादव को व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी गई. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल पेशी तक सीमित है, मुकदमे की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की गई.