आखिर क्यों हेमंत ने छोड़ा काँग्रेस का हाथ, क्यों ममता दीदी का देंगे साथ ? By Admin Mon, 13 April 2026 01:55 PM

ज्ञान रंजन रांची। असम विधानसभा चुनाव के बाद हेमंत और कल्पना की जोड़ी अब पश्चिम बंगाल मे जलवा दिखाएंगे। बड़ी बात यह है कि हेमंत-कल्पना की जोड़ी ना तो अपनी पार्टी के लिए और ना ही अपनी सरकार की प्रमुख सहयोगी काँग्रेस के लिए बंगाल जा रहे हैं बल्कि ममता बनर्जी के पक्ष मे जनता को गोलबंद करेंगे। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव मे भी हेमंत सोरेन ने बंगाल मे ममता बनर्जी का साथ दिया था। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर क्यों हेमंत सोरेन बंगाल मे काँग्रेस का हाथ छोड़कर ममता बनर्जी का साथ दे रहे हैं। आखिर क्या है हेमंत सोरेन की इसके पीछे की राजनीति? 
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सीएम हेमंत सोरेन ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को सहयोग करने का फैसला लिया है। जेएमएम प्रमुख हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन टीएमसी प्रत्याशियों के पक्ष में कई चुनावी सभा को संबोधित करेंगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मुख्य फोकस बंगाल का वह इलाका होगा जहां आदिवासी मतदाताओं की बहुलता है। पिछले विधानसभा चुनाव मे भी हेमंत सोरेन आदिवासी बहुल इलाके मे चुनाव प्रचार करने गए थे जहां तृणमूल काँग्रेस को बड़ी सफलता मिली थी। हेमंत के चुनाव प्रचार मे उतरने से भाजपा को आदिवासी बहुल इलाके मे नुकसान उठाना पड़ा था। 
टीएमसी के साथ समन्वय बनाकर प्रचार

झारखंड मुक्ति मोर्चा सांसद विजय हांसदा ने बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी और झामुमो की ओर से समन्वय बनाकर चुनाव प्रचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों ही दल पहले से ही आपस में सहयोग और समन्वय बनाकर आम लोगों की आवाज उठाते रहे हैं। सांसद विजय हांसदा ने कहा कि जिस तरह से भाजपा नेताओं ने वोट के संवैधानिक ढांचा पर प्रहार किया है, उसे देखकर सभी लोग अचंभित हैं। उन्होंने कहा कि झामुमो और टीएमसी की ओर से सदन के बाहर और सदन के अंदर लगातार इसके खिलाफ आवाज भी उठाया जाता रहा हैं। उन्होनें कहा कि जिस तरह से असम विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान शब्दों की अभिव्यक्ति और बयान में गिरावट देखने को मिला, वो काफी दुखद रहा, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया गया। चुनाव आयोग का ये रवैया हैरान करने वाला था। उधर, जेएमएम प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया कि हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन समेत पार्टी के अन्य नेता तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार करने जाएंगे। लेकिन अभी चुनावी सभा के लिए रूपरेखा तय नहीं की गई है। टीएमसी नेताओं के बातचीत कर जेएमएम नेताओं के चुनावी कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा।
हेमंत और ममता की पार्टी में समन्वय

जेएमएम प्रमुख हेमंत सोरेन और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की पार्टी के बीच पहले से ही राजनीतिक समन्वय और सहयोग की भावना मजबूत रही है। वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा में भी हेमंत सोरेन के आग्रह पर टीएमसी की ओर से प्रत्याशी नहीं देकर इंडिया गठबंधन को सहयोग दिया गया था। बाद में सरकार बनने के बाद सीएम हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण समारोह में ममता बनर्जी भी पहुंची थीं। इससे पहले बंगाल विधानसभा चुनाव मे वर्ष 2021 मे गुरुजी शिबू सोरेन ने ममता बनर्जी के पक्ष मे झामुमो को चुनाव प्रचार करने का निर्देश दिया था। 
असम चुनाव में जेएमएम की ओर से झोंकी गई थी ताकत

असम विधानसभा विधानसभा चुनाव में जेएमएम की ओर से 16 सीटों पर उम्मीदवार उतारा गया था। हेमंत सोरेन ने लगातार 11 दिनों तक असम में कैंप कर पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में कई चुनावी सभा को संबोधित किया। लेकिन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का सहयोग कर हेमंत सोरेन ने पूरे देश की राजनीति को संदेश देने का प्रयास किया है। जेएमएम की ओर से हेमंत सोरेन को पूरे देश में आदिवासी नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

चुनावी रणनीति के तहत तय हुआ दौरा
यह दौरा पूरी तरह से चुनावी रणनीति के तहत तय किया गया है। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होना है, जिसके तहत 23 और 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। ऐसे में चुनावी माहौल के बीच हेमंत सोरेन का बंगाल दौरा राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वे कई इलाकों में रोड शो और जनसभाओं के जरिए ममता बनर्जी के समर्थन में माहौल बनाने की कोशिश करेंगे।
झारखंड में सहयोगी, बंगाल में आमने-सामने होंगे कांग्रेस और झामुमो
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात यह है कि झारखंड में एक साथ सरकार चला रहे दल कांग्रेस और झामुमो पश्चिम बंगाल में एक-दूसरे के आमने-सामने नजर आएंगे। जहां एक ओर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में है, वहीं कांग्रेस भी अलग से चुनाव लड़ रही है। ऐसे में झारखंड में सहयोगी रहे दलों का बंगाल में अलग-अलग राजनीतिक रास्ता अपनाना चुनाव को और रोचक बना रहा है।
'नहीं पड़ेगा चुनावी नतीजों पर कोई असर'
वहीं दूसरी ओर भाजपा ने इस दौरे को ज्यादा प्रभावी मानने से इनकार किया है। पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी  योगेंद्र प्रताप सिंह  का कहना है कि हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन के प्रचार से पश्चिम बंगाल में कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता इस बार बदलाव के मूड में है और भाजपा के पक्ष में मतदान करने का मन बना चुकी है।
बंगाल चुनाव पर राष्ट्रीय राजनीति की नजर 
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव न केवल पश्चिम बंगाल के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी इसके दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं। झारखंड के नेताओं की सक्रिय भागीदारी इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय दल अब अपने प्रभाव को दूसरे राज्यों तक विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं।  कुल मिलाकर, असम के बाद अब पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है और हेमंत सोरेन व कल्पना सोरेन का प्रस्तावित दौरा इस राजनीतिक मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है।