‘डेजर्ट स्टॉर्म’: सेना की थार रैप्टर ब्रिगेड, सुदर्शन चक्र और कोणार्क कोर ने दिखाई संयुक्त युद्ध क्षमताBy Admin Fri, 07 November 2025 09:55 AM









नई दिल्ली — सेना की थार रैप्टर ब्रिगेड के विमानन संसाधन, सुदर्शन चक्र और कोणार्क कोर की मैकेनाइज्ड फॉर्मेशन के साथ मिलकर उच्च तीव्रता वाले संयुक्त युद्धाभ्यास कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य वास्तविक युद्ध स्थितियों में ‘सीमलेस जॉइंट कैपेबिलिटीज’ यानी निर्बाध संयुक्त क्षमताओं का परीक्षण और सत्यापन करना है। यह जानकारी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को दी।

ये एकीकृत अभ्यास सेना की दक्षिणी कमान के चल रहे रेगिस्तानी अभियानों ‘मरुज्वाला’ और ‘अखंड प्रहार’ का हिस्सा हैं, जो त्रि-सेवा ढांचे के अंतर्गत आयोजित ‘एक्सरसाइज त्रिशूल’ के तहत हो रहे हैं।

इन अभियानों का फोकस संयुक्त विमानन और मैकेनाइज्ड टैक्टिक्स, टेक्निक्स और प्रोसीजर (TTPs) को परिष्कृत और सत्यापित करने पर है, जिससे बेहतर समन्वय और युद्ध तत्परता सुनिश्चित की जा सके।

अधिकारी के अनुसार, “ये अभ्यास निगरानी और टोही मिशनों, विशेष हेलिबॉर्न अभियानों, त्वरित सैनिक तैनाती और नजदीकी समर्थन जैसी अनेक विमानन गतिविधियों को कवर करते हैं। ये तकनीकी समन्वय, परिचालन उत्कृष्टता और संयुक्तता की भावना को उजागर करते हैं।”

इन गहन और यथार्थपरक अभ्यासों के माध्यम से दक्षिणी कमान भविष्य के युद्धक्षेत्र को आकार दे रही है, जो भारतीय सशस्त्र बलों की यह क्षमता प्रदर्शित करती है कि वे एक सुसंगठित, गतिशील और तकनीकी रूप से उन्नत बल के रूप में उभर रहे हैं, जो बदलते युद्ध परिदृश्यों का प्रभावी रूप से सामना करने के लिए तैयार है।

एक्सरसाइज त्रिशूल की अगुवाई भारतीय नौसेना कर रही है, जिसमें भारतीय सेना और वायु सेना भी संयुक्त रूप से भाग ले रही हैं। यह अभ्यास नवंबर के आरंभ में शुरू हुआ।

पश्चिमी नौसेना कमान मुख्यालय इस अभ्यास का समन्वय अन्य सेवाओं के साथ मिलकर कर रहा है। इसमें राजस्थान और गुजरात के क्रीक व रेगिस्तानी इलाकों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जा रहे हैं, साथ ही उत्तर अरब सागर में व्यापक समुद्री और उभयचर अभियानों का भी संचालन हो रहा है।

गुजरात तट और उत्तर अरब सागर क्षेत्र को कवर करने वाले इस अभ्यास में सेना की दक्षिणी कमान, नौसेना की पश्चिमी कमान और वायुसेना की दक्षिण-पश्चिमी कमान प्रमुख भागीदार हैं। भारतीय तटरक्षक बल, सीमा सुरक्षा बल और अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी बड़े पैमाने पर शामिल हैं, जिससे अंतर-एजेंसी समन्वय और संयुक्त संचालन को और मजबूती मिल रही है।

अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच परिचालन प्रक्रियाओं के सत्यापन और समन्वय को बढ़ावा देना है, ताकि बहु-क्षेत्रीय (multi-domain) वातावरण में संयुक्त प्रभाव आधारित अभियानों को अंजाम दिया जा सके। प्रमुख लक्ष्यों में प्लेटफॉर्म और अवसंरचना की इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना, सेवाओं के बीच नेटवर्क एकीकरण को मजबूत करना और संयुक्त अभियानों में तालमेल को और गहरा करना शामिल है।

 

With inputs from IANS

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