सरकार का प्लान: डिजिलॉकर में एआई आधारित ई-केवाईसी और वैश्विक क्रेडेंशियल सत्यापन की तैयारीBy Admin Sat, 08 November 2025 07:03 AM









नई दिल्ली – इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने शनिवार को घोषणा की कि डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म में जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ई-केवाईसी और वैश्विक स्तर पर क्रेडेंशियल सत्यापन की सुविधा जोड़ी जाएगी।

मंत्रालय के अनुसार, डिजिलॉकर अब केवल एक सुरक्षित दस्तावेज़ भंडारण सेवा भर नहीं रहा, बल्कि यह नागरिकों, मंत्रालयों और विभिन्न विभागों को जोड़ने वाली एक भरोसेमंद डिजिटल परत (trust layer) के रूप में विकसित हो चुका है।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) द्वारा आयोजित डिजिलॉकर राष्ट्रीय सम्मेलन में इस दिशा में हुई प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई। सम्मेलन में बताया गया कि किस तरह डिजिलॉकर अब शासन, शिक्षा और उद्योग क्षेत्रों में विश्वास, सुविधा और दक्षता का केंद्रबिंदु बनता जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि डिजिलॉकर ने कागजरहित शासन, समावेशी शिक्षा और सुरक्षित डिजिटल सेवाओं को नई दिशा दी है।

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा,

“डिजिलॉकर एक ऐसा भरोसेमंद मंच है जो नागरिकों, मंत्रालयों और विभागों को जोड़ता है — जिससे सुरक्षित, पारस्परिक और जवाबदेह डिजिटल गवर्नेंस संभव हो रही है। हमारा विज़न है कि भविष्य में हर डिजिटल इंटरैक्शन विश्वसनीय हो, हर नागरिक सशक्त हो और हर संस्था जवाबदेह बने।”

कृष्णन ने आगे कहा कि डिजिलॉकर भारत की डिजिटल यात्रा को केवल कनेक्टिविटी से क्षमता निर्माण, सेवा वितरण से आत्मनिर्भरता, और अब डिजिटलीकरण से विश्वास की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने डिजिलॉकर के भावी स्वरूप की झलक पेश करते हुए बताया कि एआई आधारित ई-केवाईसी और वैश्विक स्तर पर क्रेडेंशियल सत्यापन की सुविधा जोड़कर इसे पेपरलेस गवर्नेंस का अंतरराष्ट्रीय मॉडल बनाया जाएगा।

सम्मेलन में महाराष्ट्र के पेंशन और कोषागार प्रणाली तथा असम के सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 500 से अधिक सेवाओं के साथ डिजिलॉकर के एकीकरण पर भी प्रस्तुतिकरण दिया गया।

मंत्रालय के बयान के अनुसार, असम, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, मेघालय, केरल, महाराष्ट्र और मिजोरम — इन सात राज्यों को उनके विशिष्ट कार्यों के लिए “डिजिलॉकर एक्सेलेरेटर” के रूप में सम्मानित किया गया।

डिजिलॉकर के माध्यम से नागरिक अपने पहचान पत्र, वित्तीय दस्तावेज़ों और प्रमाणपत्रों को सुरक्षित रूप से एक्सेस, सत्यापित और साझा कर सकते हैं।

 

With inputs from IANS

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