भारत समुद्री क्षेत्र को हरित, स्वच्छ और सतत बनाने की दिशा में प्रयास तेज कर रहा हैBy Admin Mon, 15 December 2025 10:01 AM









नई दिल्ली। भारत एक ऐसे परिवर्तनकारी समुद्री युग के द्वार पर खड़ा है, जहां वह अपने विशाल समुद्र तट, बढ़ती औद्योगिक क्षमता और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का उपयोग न केवल व्यापार और संपर्क को बढ़ावा देने के लिए करेगा, बल्कि सतत विकास और मजबूती की एक स्थायी विरासत भी स्थापित करेगा। यह जानकारी सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) ने ‘मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030’ तैयार किया है, जो भारत के समुद्री क्षेत्र को सशक्त बनाने के साथ-साथ उसे हरित, स्वच्छ और टिकाऊ बनाने का खाका प्रस्तुत करता है।

समुद्री परिवहन का भविष्य हरित हाइड्रोजन, अमोनिया, बायोफ्यूल और एलएनजी जैसे स्वच्छ ईंधनों पर आधारित है। इसी दिशा में भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन शून्य-उत्सर्जन ईंधनों को बढ़ावा दे रहा है, जिससे देश के बंदरगाह केवल व्यापार को ही नहीं, बल्कि एक टिकाऊ भविष्य को भी ऊर्जा प्रदान कर सकें।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने और भारत को हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने के उद्देश्य से की गई है। वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा, 6 लाख रोजगार सृजित होंगे और जीवाश्म ईंधन आयात पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी।

यह मिशन उत्पादन, पायलट परियोजनाओं, इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण, कौशल प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे और अनुसंधान पर केंद्रित है। साथ ही इस योजना के तहत इस्पात, परिवहन और उर्वरक क्षेत्रों में जीवाश्म ईंधनों के स्थान पर स्वच्छ विकल्प अपनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने कांडला, पारादीप और तूतीकोरिन—इन तीन प्रमुख बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित करने के लिए चिन्हित किया है।

दूरदर्शी कार्यक्रमों, विधायी सुधारों और हरित शिपिंग पहलों के माध्यम से भारत अपने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को भविष्य के अनुरूप ढाल रहा है—जहां स्वच्छ बंदरगाह, कम उत्सर्जन वाले बेड़े, स्मार्ट अवसंरचना और समावेशी अवसर प्राथमिकता में हैं। वर्ष 2047 की ओर बढ़ते हुए भारत स्वयं को केवल एक उभरती समुद्री शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि समुद्रों का जिम्मेदार संरक्षक, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था और पृथ्वी के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है।

इसी आधार पर ‘मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047’ तैयार किया गया है, जो भारत के समुद्री पुनरुत्थान का दीर्घकालिक रोडमैप है। इसके तहत बंदरगाहों, तटीय नौवहन, अंतर्देशीय जलमार्गों, जहाज निर्माण और हरित शिपिंग पहलों में लगभग 80 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान किया गया है।

सरकार प्रमुख बंदरगाहों पर हरित गलियारों की स्थापना, हरित हाइड्रोजन बंकरिंग की शुरुआत और मेथनॉल आधारित जहाजों के उपयोग को बढ़ावा देकर टिकाऊ समुद्री संचालन को प्रोत्साहित कर रही है।

इस विज़न के तहत 300 से अधिक ठोस और क्रियान्वयन योग्य पहलों की रूपरेखा तैयार की गई है, जिनका उद्देश्य स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को दुनिया की अग्रणी समुद्री और जहाज निर्माण शक्तियों में शामिल करना है।

‘हरित सागर ग्रीन पोर्ट दिशानिर्देश, 2023’, ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, 2023’ और ‘ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम, 2024’ जैसी पहलों के माध्यम से देश अपने बंदरगाहों और शिपिंग उद्योग को स्थिरता के प्रतीक के रूप में विकसित कर रहा है।

हाल ही में घोषित 25,000 करोड़ रुपये का मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड हरित अवसंरचना, वैकल्पिक ईंधनों और बेड़े के आधुनिकीकरण में निवेश को गति देगा, जिससे डीकार्बोनाइजेशन के क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका और मजबूत होगी, बयान में कहा गया।

 

With inputs from IANS

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