भारत में निर्मित इंजनों की वैश्विक मांग बढ़ी, बीएलडब्ल्यू ने मोज़ाम्बिक को भेजा छठा लोकोमोटिवBy Admin Wed, 17 December 2025 05:41 AM









नई दिल्ली- अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए गर्व की बात है कि बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बीएलडब्ल्यू) ने एक बार फिर लोकोमोटिव निर्माण के क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। बीएलडब्ल्यू ने स्वदेशी रूप से निर्मित 3300 हॉर्स पावर एसी–एसी डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का छठा इंजन सफलतापूर्वक मोज़ाम्बिक भेज दिया है, सरकार ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

रेल मंत्रालय के अनुसार, बीएलडब्ल्यू ने मोज़ाम्बिक के लिए 3300 हॉर्स पावर एसी–एसी डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के कुल 10 इंजनों का निर्यात ऑर्डर हासिल किया है। इन इंजनों की आपूर्ति एम/एस राइट्स (RITES) के माध्यम से की जा रही है, जिसके तहत 10 लोकोमोटिव के निर्माण और निर्यात का अनुबंध किया गया है।

इस क्रम में पहले दो लोकोमोटिव जून 2025 में भेजे गए थे, तीसरा सितंबर में और चौथा अक्टूबर में रवाना हुआ। पांचवां लोकोमोटिव 12 दिसंबर को और छठा 16 दिसंबर को मोज़ाम्बिक के लिए प्रेषित किया गया।

यह निर्यात वैश्विक स्तर पर लोकोमोटिव निर्माण में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। बीएलडब्ल्यू द्वारा निर्मित ये अत्याधुनिक 3300 हॉर्स पावर के केप गेज (1067 मिमी) लोकोमोटिव हैं, जो 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से संचालन में सक्षम हैं।

इन इंजनों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ड्राइवर-फ्रेंडली सुविधाएं दी गई हैं, जिनमें रेफ्रिजरेटर, हॉट प्लेट, मोबाइल होल्डर और आधुनिक कैब डिज़ाइन शामिल हैं, जिससे आराम और संचालन दक्षता दोनों में वृद्धि होती है।

वाराणसी स्थित बीएलडब्ल्यू, जो भारतीय रेलवे के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है, अब लोकोमोटिव निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है। स्वदेशी डिजाइन और उन्नत रेल तकनीक के निर्माण में अपनी विशेषज्ञता के जरिए यह वैश्विक रेलवे बाजारों में भारत की उपस्थिति को मजबूत कर रहा है।

वर्ष 2014 से अब तक बीएलडब्ल्यू श्रीलंका, म्यांमार और मोज़ाम्बिक जैसे देशों को लोकोमोटिव निर्यात कर चुका है, जिससे इन देशों की रेलवे प्रणालियों के विकास में सहयोग मिला है।

‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ के विजन के अनुरूप, ये निर्यात भारतीय रेलवे की उस क्षमता को दर्शाते हैं, जिसके तहत वह दुनिया में प्रचलित विभिन्न गेज प्रणालियों के लिए रोलिंग स्टॉक का डिजाइन, निर्माण और आपूर्ति कर सकता है।

इन पहलों के माध्यम से भारतीय रेलवे साझेदार देशों को अपनी रेल अवसंरचना को उन्नत करने में सहायता कर रहा है और साथ ही रेलवे रोलिंग स्टॉक और संबंधित सेवाओं के एक विश्वसनीय निर्यातक के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत कर रहा है।

अब तक भारत यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और इटली जैसे यूरोपीय देशों को मेट्रो कोच, बोगियां, यात्री कोच, लोकोमोटिव और अन्य महत्वपूर्ण रेलवे उपकरण निर्यात कर चुका है।

अफ्रीका में मोज़ाम्बिक, गिनी गणराज्य और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश शामिल हैं, जबकि अन्य प्रमुख देशों में म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और मैक्सिको का नाम आता है, मंत्रालय ने बताया।

 

With inputs from IANS

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