बड़े भाषा मॉडल्स से खत्म हो जाएंगी कई सॉफ्टवेयर नौकरियां: श्रीधर वेंबूBy Admin Sun, 18 May 2025 06:04 AM









नई दिल्ली: प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबू ने रविवार को कहा कि आने वाले समय में बड़े भाषा मॉडल्स (LLMs) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता के कारण सॉफ्टवेयर क्षेत्र की कई नौकरियां समाप्त हो सकती हैं।

उनका यह बयान इस बढ़ती चिंता को दर्शाता है कि एआई निकट भविष्य में करोड़ों नौकरियों की जगह ले सकता है।

वेंबू ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा,
"मैंने अक्सर अपनी टीम से कहा है कि यह कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं है कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को मैकेनिकल या सिविल इंजीनियरों, केमिस्ट्स या स्कूल शिक्षकों से ज़्यादा वेतन मिले। हमें इसे हमेशा के लिए कायम मानकर नहीं चलना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा,
"इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि ग्राहक हमेशा हमारे उत्पादों के लिए भुगतान करते रहेंगे। यह याद दिलाने की ज़रूरत है कि हमें भी ‘डिसरप्ट’ किया जा सकता है — और जितना ज़्यादा हम यह मानते हैं कि हमारे साथ ऐसा नहीं होगा, उतना ही ज़्यादा यह होने की संभावना होती है। जैसा कि इंटेल के एंडी ग्रोव ने कहा था, ‘सिर्फ वही बचता है जो चिंतित रहता है।’”

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) ने पिछले महीने कहा था कि वैश्विक स्तर पर करीब 40 प्रतिशत नौकरियां एआई से प्रभावित हो सकती हैं।

वेंबू ने चेताया,
"सॉफ्टवेयर विकास में जो उत्पादकता क्रांति मैं आते देख रहा हूं (LLMs + टूलिंग), उससे बड़ी संख्या में सॉफ्टवेयर की नौकरियां समाप्त हो सकती हैं। यह सच्चाई कड़वी है, लेकिन इसे समझना ज़रूरी है।"

इससे पहले मई की शुरुआत में Zoho ने अपने महत्वाकांक्षी 700 मिलियन डॉलर के सेमीकंडक्टर चिप निर्माण प्रोजेक्ट को रोक दिया था। वेंबू ने बताया कि वर्तमान तकनीकी मार्ग को लेकर पर्याप्त भरोसा नहीं होने के कारण यह निर्णय लिया गया।

उन्होंने लिखा,
"चिप फैब्रिकेशन एक अत्यधिक पूंजी-प्रधान व्यवसाय है और इसके लिए सरकार का मजबूत समर्थन ज़रूरी है। जब हम करदाताओं का पैसा इस्तेमाल कर रहे हों, तो हमें तकनीक के रास्ते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा,
"चूंकि हमें मौजूदा तकनीकी मार्ग पर भरोसा नहीं था, इसलिए बोर्ड ने फिलहाल इस योजना को स्थगित करने का निर्णय लिया है — जब तक कि हमें कोई बेहतर तकनीकी विकल्प न मिल जाए।"

 

(With inputs from IANS)

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