सिकल सेल रोग: भारत ने 6 करोड़ जांच का लक्ष्य पूरा किया, सरकार ने दी जानकारीBy Admin Wed, 23 July 2025 04:37 AM









नई दिल्ली: राष्ट्रीय सिकल सेल मिशन के तहत सरकार ने अब तक देशभर में 6 करोड़ लोगों की सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease - SCD) के लिए जांच की है, जबकि कुल लक्ष्य 7 करोड़ का है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को दी।

सिकल सेल रोग एक दीर्घकालिक, एकल-जीन विकार है, जो गंभीर प्रणालीगत लक्षण उत्पन्न करता है जैसे कि पुरानी रक्ताल्पता (एनीमिया), तीव्र दर्द के दौरे, अंगों का क्षय, और अंगों को दीर्घकालिक नुकसान। यह रोग जीवन प्रत्याशा को गंभीर रूप से प्रभावित करता है और मरीज के पूरे जीवन को प्रभावित करता है।

मंत्रालय के अनुसार, जांच किए गए 6 करोड़ लोगों में से 2.15 लाख लोगों में यह बीमारी पाई गई और 16.7 लाख लोग इसके वाहक (carrier) के रूप में पहचाने गए।

इसके साथ ही, संबंधित राज्यों द्वारा 2.6 करोड़ हेल्थ कार्ड उन व्यक्तियों को वितरित किए गए हैं, जिनकी जांच की गई है।

सिकल सेल रोग के सर्वाधिक मामलों की सूचना ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से मिली है।

मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटक और उत्तराखंड ने अपने निर्धारित लक्ष्यों की तुलना में उच्च जांच प्रतिशत प्राप्त किया है।

यह रोग विशेष रूप से भारत में आदिवासी आबादी में प्रचलित है, हालांकि यह गैर-आदिवासियों को भी प्रभावित करता है।

इस बीमारी के बोझ को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जुलाई 2023 को मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की शुरुआत की थी।

इस मिशन का उद्देश्य है कि वर्ष 2047 से पहले भारत से सिकल सेल रोग को एक जनस्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त किया जाए। इसके लिए 2025-26 तक प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में 0 से 40 वर्ष की उम्र के 7 करोड़ लोगों की यूनिवर्सल स्क्रीनिंग की जानी है।

मंत्रालय ने बताया कि “स्क्रीनिंग के लिए प्रमाणित पॉइंट-ऑफ-केयर टेस्टिंग (POCT) किट्स का उपयोग किया जा रहा है, जो तेज, विश्वसनीय और पुष्टिकरण परिणाम सुनिश्चित करती हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा एक समर्पित डैशबोर्ड और सिकल सेल रोग पोर्टल भी स्थापित किया गया है, जो सभी राज्यों से स्क्रीनिंग डेटा को एकत्र करता है।”

मंत्रालय ने आगे कहा कि, “भविष्य की प्राथमिकताओं में शेष लक्ष्य की पूर्ति के लिए स्क्रीनिंग प्रयासों को तेज करना, और पहचाने गए रोगियों व वाहकों के लिए परामर्श और फॉलो-अप सेवाएं सुनिश्चित करना शामिल है।”

 

With inputs from IANS

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