अमेरिका-भारत संबंध मजबूत, मतभेद सुलझाने पर वार्ता ‘बेहद उत्पादक’: वरिष्ठ अधिकारीBy Admin Thu, 25 September 2025 03:19 AM









न्यूयॉर्क- अमेरिका के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हालिया “उथल-पुथल” के बावजूद भारत और अमेरिका के रिश्ते मजबूत हैं। व्यापार और रूसी तेल खरीद को लेकर मतभेद सुलझाने के लिए हुई बातचीत “बेहद उत्पादक” रही है।

अधिकारी ने बुधवार (स्थानीय समय) को कहा, “हमारे बीच मतभेद हैं, यह स्पष्ट है। बीते कुछ हफ्तों से हम खासतौर पर व्यापार और रूसी तेल खरीद के मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। ये बातचीत बेहद उत्पादक रही हैं।”

अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ने सर्जियो गोर को नामित किया है, जो उनके बेहद करीबी माने जाते हैं। गोर ने ट्रंप के चुनाव अभियान में अहम भूमिका निभाई थी और राष्ट्रपति के पर्सनल ऑफिस के निदेशक भी रहे। अब उन्हें दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत नियुक्त किया गया है।

हालांकि अधिकारी ने स्पष्ट किया कि गोर की प्राथमिक भूमिका भारत में राजदूत की होगी, जहां से वे राष्ट्रपति के निर्देश पर क्षेत्र के 13 देशों से भी जुड़ेंगे। “उनकी पहली और औपचारिक जिम्मेदारी भारत में राजदूत की होगी और वह इस अहम द्विपक्षीय संबंध पर ध्यान देंगे।”

अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति के इतने करीबी व्यक्ति का नई दिल्ली में मौजूद होना पूरे क्षेत्र के लिए फायदेमंद साबित होगा।

भारत इस साल क्वाड शिखर सम्मेलन (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का इंडो-पैसिफिक केंद्रित समूह) की मेजबानी करेगा। अधिकारी ने कहा कि ट्रंप इसमें शामिल होंगे और तारीखों पर काम चल रहा है।

अधिकारी ने माना कि ट्रंप की बेबाकी के चलते नीतियों में उतार-चढ़ाव दिखते हैं, लेकिन इसे उन्होंने पारदर्शिता बताया। “राष्ट्रपति किसी देश से नाराज़ होते हैं तो आप उसे ट्रुथ सोशल पर देखेंगे। यह अब तक की सबसे पारदर्शी प्रशासन व्यवस्था है, जिसमें सीधे राष्ट्रपति के विचार सामने आते हैं।”

रूस से तेल खरीद पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ और ईरान के चाबहार बंदरगाह पर फिर से लगाए गए प्रतिबंधों को अधिकारी ने भारत के खिलाफ कदम नहीं, बल्कि विरोधियों पर दबाव बनाने की रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि “लाइसेंस रद्द करने का असर सभी देशों पर है, सिर्फ भारत पर नहीं।”

उन्होंने इस आलोचना को भी खारिज किया कि चीन और यूरोपीय संघ पर कोई दंडात्मक टैरिफ नहीं लगाया गया। अधिकारी ने कहा कि “यूरोपीय संघ और चीन को भी यही सख्त संदेश दिया जा रहा है।”

सीनेटरों द्वारा प्रस्तावित कानून का हवाला देते हुए अधिकारी ने कहा कि उसमें रूसी ऊर्जा खरीदने वालों पर 500% टैरिफ का प्रावधान है, इसलिए मौजूदा 25% टैरिफ उतना भारी नहीं लगता।

एच1बी वीज़ा पर सालाना 1 लाख डॉलर शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर भी अधिकारी ने कहा कि इस पर भारत से बातचीत जारी है और अब तक कोई बड़ा विरोध या चिंता सामने नहीं आई। “कंपनियां और संगठन कुशल पेशेवरों को लाना जारी रखेंगे। इस बदलाव का एक मकसद वीज़ा प्रक्रिया में धोखाधड़ी को रोकना भी है।”

 

With inputs from IANS

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