दो-राष्ट्र समाधान से इन्कार, फ़िलिस्तीन के लिए उभरते पश्चिमी समर्थन की निंदा: नेतन्याहूBy Admin Sat, 27 September 2025 04:18 AM









संयुक्त राष्ट्र - इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को दो-राष्ट्र समाधान को सख़्ती से खारिज करते हुए कहा कि एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना उनके देश के लिए “आत्मघाती” होगी।

उन्होंने फ़्रांस, कनाडा और ब्रिटेन सहित उन पश्चिमी देशों को “भोला” बताया, जिन्होंने फ़िलिस्तीन को मान्यता दी है, और इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित उस प्रस्ताव की निंदा की, जिसमें भारी बहुमत से दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया गया था।

नेतन्याहू ने पश्चिमी देशों से कहा, “हम आपको मीडिया और अन्य दबावों के चलते हमारे गले में एक आतंकी राज्य ठूंसने नहीं देंगे।”

उन्होंने आरोप लगाया कि उनका संदेश यही था कि “यहूदियों की हत्या का फायदा मिलता है,” और दुनिया भर में यहूदियों पर हमलों का हवाला दिया।

गाज़ा को लेकर उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक हमास हथियार नहीं डालता और 2023 के हमले में लिए गए शेष बंधकों को रिहा नहीं करता, तब तक इज़राइल “काम पूरा” करेगा। उस हमले में 1,200 से अधिक लोग मारे गए थे।

“बंधकों को तुरंत छोड़ दो,” नेतन्याहू ने हमास से कहा। “अगर ऐसा करोगे तो ज़िंदा रहोगे, अगर नहीं, तो इज़राइल तुम्हें ढूंढ निकालेगा।”

उनके भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि महासभा हॉल से बाहर चले गए, जबकि कुछ देशों ने तालियाँ बजाकर समर्थन किया।

नेतन्याहू, जो अक्सर प्रॉप्स का इस्तेमाल करते हैं, इस बार डिजिटल अंदाज़ में नज़र आए। उन्होंने अपने लैपल पर एक क्यूआर कोड लगाया, जिसके ज़रिए दर्शकों को उन वेबसाइटों पर भेजा गया, जहाँ इज़राइलियों पर हमास के अत्याचार दिखाए गए। इसके अलावा उन्होंने एक “पॉप क्विज़” भी रखा, जिसमें दर्शकों से पूछा गया कि “इज़राइल से नफरत कौन करता है?” और उत्तर में उन्होंने आतंकी संगठनों से लेकर ईरान तक की सूची दिखाई।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर नेतन्याहू के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन हुए। डैग हैमरशोल्ड प्लाज़ा में लोग हमास हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दे रहे थे और बंधकों की तस्वीरें दिखाकर उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर, फ़िलिस्तीन समर्थक और हमास के पक्षधर प्रदर्शनकारियों ने उन्हें “जनसंहार” का दोषी बताया।

महासभा में और बाहर लगे इन आरोपों को नेतन्याहू ने यह कहते हुए ख़ारिज किया कि यह यहूदी-विरोध (एंटी-सेमिटिज़्म) को बढ़ावा देने का बहाना है। उन्होंने दावा किया कि इज़राइल ने किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सूचना दी थी। “अगर हमारा मक़सद नरसंहार होता, तो हम नागरिक हताहतों से बचने की कोशिश क्यों करते?”

उन्होंने कहा कि इज़राइल गाज़ा में भोजन नहीं रोक रहा, बल्कि वहां टन के हिसाब से आपूर्ति भेज रहा है, लेकिन हमास उसे लूटकर आम लोगों तक पहुँचने से रोक रहा है।

नेतन्याहू ने फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की मांग को 9/11 हमले के बाद न्यूयॉर्क से कुछ मील दूर अल-क़ायदा का राष्ट्र बनाने जैसी “बेतुकी सोच” बताया।

दूसरी ओर, फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने गुरुवार को अपने भाषण में हमास की आलोचना करते हुए बंधकों की रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीनी लोग सशस्त्र राज्य नहीं चाहते और इज़राइल को मान्यता देते हैं।

हालाँकि नेतन्याहू ने सबसे कठोर शब्द ईरान के लिए इस्तेमाल किए, उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल सीरिया के साथ संबंध सामान्य करने के लिए बातचीत कर रहा है—जो कभी अकल्पनीय था।

 

With inputs from IANS

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