बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान में 51 ठिकानों पर किया हमला, दक्षिण एशिया में 'नया व्यवस्था' घोषित कियाBy Admin Mon, 12 May 2025 06:45 AM









बलूचिस्तान (IANS): बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले बलूचिस्तान में 51 से अधिक स्थानों पर 71 समन्वित हमलों की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने इसे एक बड़ा सैन्य अभियान करार देते हुए कहा है कि दक्षिण एशिया में अब एक "नया व्यवस्था अनिवार्य हो गया है।"

बीएलए ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि वह किसी बाहरी ताकत की कठपुतली नहीं है और क्षेत्रीय रणनीतिक परिदृश्य में वह एक "सक्रिय और निर्णायक शक्ति" के रूप में उभर रहा है।

इन हमलों में पाकिस्तान के सैन्य काफिलों, खुफिया ठिकानों और खनिज संसाधनों की ढुलाई करने वाले अभियानों को निशाना बनाया गया। यह अभियान इस्लामाबाद की बलूचिस्तान पर पकड़ को चुनौती देने के उद्देश्य से चलाया गया था।

बीएलए ने कहा, "हम बलूच राष्ट्रवादी प्रतिरोध को किसी भी देश या ताकत की प्रॉक्सी मानने के विचार को सख्ती से खारिज करते हैं। हम न तो किसी के मोहरे हैं और न ही मूक दर्शक। वर्तमान और भविष्य के सैन्य, राजनीतिक और रणनीतिक ढांचे में हमारा एक उचित स्थान है, और हम अपनी भूमिका से भलीभांति अवगत हैं।"

संगठन ने पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड और धोखेबाज़ी का आरोप लगाते हुए कहा, "पाकिस्तान की हर शांति की बात, युद्धविराम और भाईचारे की पेशकश सिर्फ एक छलावा है — एक रणनीति है युद्ध को छिपाने की।" उन्होंने भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस्लामाबाद की "छलपूर्ण शांति नीति" से सावधान रहने को कहा।

बीएलए ने पाकिस्तान को एक ऐसा राष्ट्र बताया "जिसके हाथ खून से रंगे हैं और जिसकी हर कसम उसमें डूबी हुई है।"

बीएलए के प्रवक्ता जियंद बलोच ने कहा कि यह अभियान केवल तबाही के लिए नहीं था, बल्कि "रणनीतिक तैयारियों की परख" के लिए था।

उन्होंने कहा, "भारत-पाकिस्तान तनाव के चरम पर, बीएलए ने पाकिस्तान सेना के खिलाफ एक और मोर्चा खोलते हुए इन हमलों को अंजाम दिया। इसका उद्देश्य दुश्मन को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि संगठित युद्ध के लिए सैन्य समन्वय, ज़मीनी नियंत्रण और रक्षात्मक स्थितियों की जांच करना था।"

संगठन ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर भी हमला बोलते हुए कहा कि "पाकिस्तान केवल वैश्विक आतंकवाद की शरणस्थली नहीं, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठनों का राज्य-प्रायोजित पालक भी है।"

बीएलए ने दुनिया, खासतौर से भारत से राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य समर्थन की अपील की। उन्होंने कहा, "अगर हमें भारत सहित वैश्विक समर्थन मिले, तो बलूच राष्ट्र इस आतंकवादी राज्य को खत्म कर सकता है और एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और स्वतंत्र बलूचिस्तान की नींव रख सकता है।"

अंत में बीएलए ने चेताया कि "पाकिस्तान जैसे कट्टरपंथी सैन्य शासन के पास परमाणु हथियारों का नियंत्रण, न केवल क्षेत्र के लिए बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए भी एक टाइम बम है।"

वहीं, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने इन हमलों को महज़ 1,500 लोगों की करतूत बताते हुए कमतर आंका।

बलूचिस्तान, जो प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, लंबे समय से आर्थिक उपेक्षा का शिकार रहा है। इस्लामाबाद-रावलपिंडी के सत्ता केंद्रों पर यह आरोप है कि उन्होंने प्रदेश की संपदा का दोहन किया लेकिन वहां के लोगों के लिए कुछ नहीं किया।

यह संघर्ष दक्षिण एशिया के सबसे लंबे चल रहे स्वतंत्रता आंदोलनों में से एक का हिस्सा है, जो दशकों से उपेक्षा, शोषण और स्वायत्तता की मांग को लेकर जारी है।

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