डावोस में ट्रंप ने मिस्र की सराहना की, गाज़ा में शांति का दावा किया, ईरान को दी चेतावनीBy Admin Thu, 22 January 2026 09:21 AM









वॉशिंगटन  - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी के साथ बातचीत के बाद मध्य पूर्व पहले से अधिक स्थिर हुआ है। उन्होंने गाज़ा में प्रगति, ईरान पर लगातार दबाव और अपनी प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल को लेकर बढ़ती दिलचस्पी का उल्लेख किया।

बुधवार (स्थानीय समय) को डावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के इतर हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद ट्रंप ने क्षेत्रीय कूटनीति में मिस्र की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, “मिस्र ने शानदार भूमिका निभाई है।”

ट्रंप ने बताया कि बातचीत में गाज़ा की स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा और इथियोपिया में नील नदी पर बने विशाल बांध को लेकर जारी विवाद पर चर्चा हुई। उन्होंने इस बांध को दुनिया के सबसे बड़े बांधों में से एक बताते हुए कहा कि यह नील नदी के प्रवाह को काफी हद तक रोक देता है और यह एक गंभीर समस्या है।

उन्होंने कहा कि मिस्र हजारों वर्षों से नील नदी पर निर्भर रहा है और पानी की आपूर्ति में कटौती एक खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती है। ट्रंप ने कहा कि वह इस मुद्दे के समाधान के लिए मिस्र और इथियोपिया के नेताओं को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश करेंगे।

गाज़ा को लेकर ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि अमेरिका की भूमिका निर्णायक रही है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका हस्तक्षेप नहीं करता, तो वहां शांति संभव नहीं होती। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अभी भी कुछ खतरे बने हुए हैं।

ट्रंप ने हमास और अन्य सशस्त्र समूहों का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि अगर वे हथियार नहीं छोड़ते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने लेबनान में हिज़्बुल्लाह को भी चिंता का विषय बताया, हालांकि इसे व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में द्वितीयक बताया।

ईरान ट्रंप के बयानों में प्रमुखता से शामिल रहा। उन्होंने दोहराया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण ईरान परमाणु हथियार हासिल करने से रुक गया। ट्रंप का दावा था कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान कुछ ही महीनों में परमाणु हथियार बना लेता।

उन्होंने कहा कि ईरान पर प्रतिबंध और दंडात्मक कदम जारी रहेंगे और यदि तेहरान ने फिर से परमाणु गतिविधियां शुरू कीं, तो आगे की कार्रवाई से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

ट्रंप ने अपनी प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल को भी आगे बढ़ाया और इसे युद्धविराम को स्थायी बनाने तथा बड़े संघर्षों को रोकने के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय मंच बताया। उन्होंने कहा कि कई प्रभावशाली लोग और देश इसमें शामिल होना चाहते हैं, हालांकि कुछ देशों को संसदीय मंजूरी लेनी होगी।

ग्रीनलैंड को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

मध्य पूर्व में स्थिरता पर ट्रंप का जोर भारत जैसे देशों के लिए भी अहम है, जो इस क्षेत्र से बड़े पैमाने पर ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। गाज़ा में तनाव में कमी और ईरान पर दबाव से तेल बाजारों और समुद्री व्यापार मार्गों से जुड़े जोखिम कम हो सकते हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

With inputs from IANS

ADVERTISEMENT
Advertisement
ADVERTISEMENT
Advertisement

ADVERTISEMENT
Advertisement

ADVERTISEMENT
Advertisement
ADVERTISEMENT
Advertisement