





नई दिल्ली — भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर ने अमेरिका में व्यापारिक जगत के प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। यह मुलाकात यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) द्वारा आयोजित एक गोलमेज चर्चा के दौरान हुई।
वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास ने अपने X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस बैठक में सरकार-से-सरकार (G2G), शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों को आगे बढ़ाया जा सके। यह 21वीं सदी की साझेदारी को नया रूप देने के लिए अहम है।
बैठक के बाद USISPF ने कहा कि वह इस उच्चस्तरीय बंद-द्वार चर्चा की मेजबानी कर गौरवान्वित है।
USISPF के अनुसार, “संवाद का केंद्र बिंदु TRUST पहल के तहत अमेरिका-भारत के बीच महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों में सहयोग को गहराना रहा। इसका उद्देश्य सरकार, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच मजबूत साझेदारी के ज़रिए एक सुरक्षित, पारदर्शी और लचीला नवाचार तंत्र विकसित करना है।”
विदेश सचिव विक्रम मिस्री की यह तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा 27 से 29 मई तक चली। यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम कराने का दावा किया था, जिससे कुछ कूटनीतिक असहजता बनी हुई थी।
इस यात्रा के दौरान मिस्री ने अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ और वाणिज्य विभाग के अवर सचिव जेफ्री केसलर से भी मुलाकात की।
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी बयान में कहा गया कि उप विदेश मंत्री लैंडौ ने भारत-अमेरिका के बीच करीबी रणनीतिक साझेदारी को दोहराया, जिसे 21वीं सदी की अमेरिकी विदेश नीति का एक अहम हिस्सा बताया गया।
बयान में यह भी कहा गया कि उन्होंने विनिमय और निष्पक्ष बाजार पहुंच को आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही प्रवास नीति और मादक पदार्थों की रोकथाम के क्षेत्र में सहयोग को भी आवश्यक बताया।
विदेश सचिव और अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
WIth inputs from IANS




