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बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। कमजोर बैंकिंग क्षेत्र, ऊर्जा की कमी, राजस्व संग्रह में कमजोरी, लगातार ऊंची महंगाई, घटती प्रतिस्पर्धात्मकता और बढ़ते राजकोषीय दबाव ने आर्थिक सुधार की चुनौती को और गंभीर बना दिया है। विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि तेज संरचनात्मक सुधारों के अभाव में देश की आर्थिक वृद्धि आने वाले समय में भी कमजोर रह सकती है।
स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की ‘बांग्लादेश डेवलपमेंट अपडेट’ रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी दी। ‘मेक सब्सिडीज एंड सोशल प्रोटेक्शन वर्क बेटर फॉर द पुअर’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों और गरीब तबके पर उनके प्रभाव का आकलन किया गया है।
विश्व बैंक के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में बांग्लादेश की आर्थिक वृद्धि दर 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के समान ही है और पिछले एक दशक के 5.6 प्रतिशत के औसत से काफी नीचे है। वित्त वर्ष 2027-28 में वृद्धि दर में मामूली सुधार होकर 3.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन बैंकिंग क्षेत्र के जोखिम, ऊर्जा संकट, कमजोर कारोबारी माहौल और सीमित राजकोषीय गुंजाइश विकास की रफ्तार पर दबाव बनाए रख सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, विकास दर में गिरावट के पीछे निवेश में कमी एक प्रमुख कारण रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में निजी निवेश में 0.5 प्रतिशत और सार्वजनिक निवेश में 0.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसी दौरान वस्तुओं और सेवाओं के वास्तविक निर्यात में भी 4.8 प्रतिशत की कमी आई।
ऊर्जा सुरक्षा बांग्लादेश के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। घरेलू गैस उत्पादन में गिरावट के कारण देश को तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी के आयात पर अधिक निर्भर होना पड़ रहा है। अब बांग्लादेश अपनी गैस जरूरत का करीब एक-तिहाई हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।
ईंधन और गैस की कमी का सीधा असर उद्योगों पर पड़ा है। बिजली उत्पादन की पर्याप्त क्षमता होने के बावजूद ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था की बाधाओं के कारण उसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। कई कारखानों को अपनी क्षमता से कम उत्पादन करना पड़ रहा है या अस्थायी रूप से काम रोकना पड़ रहा है। बिजली की कमी और डीजल जनरेटर पर बढ़ती निर्भरता ने कारोबार की लागत भी बढ़ा दी है।
विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि यदि ऊर्जा आपूर्ति की समस्या लंबे समय तक बनी रही, तो निजी निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में सुधार और टल सकता है। इसका असर रोजगार और आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ सकता है।
आर्थिक संकट का असर देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। विश्व बैंक के मुताबिक, सबसे गरीब परिवारों में से करीब आधे परिवार अब भी सरकारी सुरक्षा-जाल यानी सेफ्टी-नेट कार्यक्रमों से बाहर हैं। वहीं, गरीबी रेखा से ठीक ऊपर जीवन यापन कर रहे करीब 6.2 करोड़ लोगों के दोबारा गरीबी में जाने का जोखिम बना हुआ है।
रिपोर्ट में सब्सिडी व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है। बांग्लादेश ऊर्जा, उर्वरक सब्सिडी और सामाजिक सुरक्षा पर हर साल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का करीब 3.5 प्रतिशत खर्च करता है, लेकिन इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है।
विश्व बैंक ने विशेष रूप से बिजली सब्सिडी के वितरण का उल्लेख करते हुए कहा कि सबसे अमीर शहरी परिवारों को बिजली सब्सिडी का करीब आधा हिस्सा मिल रहा है। इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा सब्सिडी व्यवस्था में लक्षित सुधार की जरूरत है, ताकि सीमित सरकारी संसाधनों का अधिक हिस्सा गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक पहुंच सके।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था इस समय एक साथ कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रही है। बैंकिंग क्षेत्र की कमजोरी, ऊर्जा आपूर्ति की बाधाएं, निवेश में गिरावट और कमजोर राजकोषीय स्थिति के बीच सरकार के लिए विकास को गति देना और साथ ही गरीब तबके को आर्थिक झटकों से बचाना बड़ी चुनौती बन गया है। विश्व बैंक के आकलन से संकेत मिलता है कि टिकाऊ आर्थिक सुधार के लिए केवल अल्पकालिक राहत के बजाय बैंकिंग, ऊर्जा, निवेश और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव जरूरी होंगे।