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ईरान ने क्षेत्रीय देशों को चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका के साथ उसका सैन्य संघर्ष दोबारा शुरू होता है, तो अमेरिकी सेना की मदद करने वाले देशों को तेहरान के प्रति शत्रुतापूर्ण रुख अपनाने वाला माना जाएगा। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य फदा हुसैन मालेकी ने शुक्रवार को यह चेतावनी दी।
रूसी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती को दिए एक साक्षात्कार में मालेकी ने कहा कि सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होने की स्थिति में ईरान यह पहचान सकता है कि क्षेत्र के कौन-कौन से देश अमेरिकी सेना का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे देशों के खिलाफ ईरान की कार्रवाई केवल वहां स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों तक सीमित नहीं रह सकती। उनके मुताबिक, संबंधित देशों को भी शत्रु राष्ट्रों की श्रेणी में रखा जा सकता है।
इस बयान से पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ने की आशंका है। हालांकि, मालेकी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान किन देशों को निशाने पर लेने पर विचार कर सकता है या किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की क्या रूपरेखा होगी।
इजरायल की रक्षा पर अमेरिका के खर्च को लेकर ईरान का आरोप
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दावा किया कि अमेरिका ने पिछले तीन वर्षों में इजरायल की मिसाइल रक्षा प्रणाली पर अपने करदाताओं के 11 अरब डॉलर खर्च किए हैं।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, अराघची ने कहा कि इजरायल की रक्षा करते हुए अमेरिका ने खुद इजरायल से भी अधिक इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने इस संबंध को दोनों देशों के बीच पारस्परिक लाभ वाली साझेदारी मानने पर सवाल उठाया और इसकी आलोचना की।
अराघची की यह टिप्पणी इजरायल की सुरक्षा में अमेरिकी सैन्य और वित्तीय सहायता की भूमिका को लेकर ईरान के विरोध को दर्शाती है।
ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई दोबारा करने की संभावना से इनकार नहीं किया
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने किसी नए अभियान, संभावित लक्ष्य या कार्रवाई की समयसीमा के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
वॉशिंगटन से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर अमेरिकी जनता की राय बंटी हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके फैसले का समर्थन करते हैं, जबकि अन्य इससे असहमत हो सकते हैं।
ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सैन्य कार्रवाई की राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है, खासकर आगामी अमेरिकी कांग्रेस चुनावों के मद्देनजर।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दे सकता। उन्होंने सैन्य कार्रवाई के प्रभाव का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि अमेरिका आगे कुछ और कार्रवाई कर सकता है।
हालांकि, राष्ट्रपति ने यह नहीं बताया कि वह वास्तव में नए हमले की योजना बना रहे हैं या नहीं।
पश्चिम एशिया में बढ़ सकता है टकराव
ईरान की ताजा चेतावनी और ट्रंप के बयान ऐसे समय आए हैं, जब क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंकाएं बनी हुई हैं। यदि संघर्ष दोबारा शुरू होता है, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी करने वाले क्षेत्रीय देशों के सामने सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
ईरान की ओर से सहयोगी देशों को शत्रु मानने की चेतावनी यह संकेत देती है कि संभावित संघर्ष का दायरा केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित रहने की गारंटी नहीं है। दूसरी ओर, वॉशिंगटन की ओर से आगे की कार्रवाई को लेकर स्पष्ट समयसीमा नहीं दिए जाने के कारण क्षेत्र की स्थिति पर अनिश्चितता बनी हुई है।