एआई से बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने की आशंका कम, नए कौशल से खुलेंगे अवसर: एंड्रयू एनजीBy IANS Fri, 23 October 2026 06:21 PM

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विशेषज्ञ एंड्रयू एनजी ने कहा है कि एआई के कारण बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने की आशंका फिलहाल उतनी गंभीर नहीं है, जितनी अक्सर बताई जा रही है। उनका मानना है कि नई तकनीक के साथ तालमेल बिठाने और नए कौशल सीखने वाले कर्मचारियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

एनजी ने एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में छात्रों और पेशेवरों को सलाह दी कि वे मशीनों द्वारा अपनी नौकरियां छीन लिए जाने के डर में रहने के बजाय अपने कौशल को लगातार बेहतर बनाने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को केवल मौजूदा रोजगार बाजार की जरूरतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भविष्य में काम करने के तरीकों में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।

एआई विशेषज्ञ के मुताबिक, मौजूदा एआई प्रणालियां अभी ऐसी स्थिति में नहीं पहुंची हैं कि वे अधिकांश नौकरियों को पूरी तरह समाप्त कर दें। इसके विपरीत, कई क्षेत्रों में ये तकनीक कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ा रही है। इससे कंपनियां अधिक काम करने, अपने कारोबार का विस्तार करने और अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने में सक्षम हो सकती हैं।

एनजी ने कहा कि एआई से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी की आशंकाओं को लेकर चल रहा प्रचार वास्तविक स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ कंपनियां अपनी क्षमता को वास्तविकता से अधिक बड़ा दिखाने या प्रचार हासिल करने के लिए एआई के कारण नौकरियों के बड़े संकट की चर्चा को हवा देती हैं। उनके अनुसार, हालिया आंकड़े भी इस बात की ओर इशारा करते हैं कि एआई कुछ नौकरियों को खत्म करने के साथ नए रोजगार पैदा भी कर रहा है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का उदाहरण देते हुए एनजी ने कहा कि एआई की मदद से इंजीनियर अधिक तेजी से और प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं। इससे सॉफ्टवेयर विकसित करने की कंपनियों की क्षमता बढ़ती है और वे अधिक इंजीनियरों को नियुक्त करना चाह सकती हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की भर्ती से जुड़े विज्ञापनों में वृद्धि देखी गई है।

एनजी का अनुमान है कि जैसे-जैसे एआई उपकरण दूसरे उद्योगों में भी व्यापक रूप से इस्तेमाल होंगे, वहां भी इसी तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, इसके लिए कर्मचारियों को नए कौशल सीखने और बदलती कार्यप्रणाली के अनुरूप खुद को तैयार करने की जरूरत होगी।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौती को रेखांकित करते हुए कहा कि छात्रों को केवल आज की नौकरियों के लिए तैयार करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसे कौशल सिखाने होंगे, जो 2028 और उसके बाद के रोजगार बाजार में भी उपयोगी साबित हों।

एआई के विकास की दिशा पर भी उठ रहे सवाल

हालांकि, एआई के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों के बीच पूरी सहमति नहीं है। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के अर्थशास्त्री डारोन एसेमोग्लू के एक हालिया शोधपत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि एआई का विकास मौजूदा दिशा में ही आगे बढ़ता रहा, तो इससे आर्थिक असमानता बढ़ सकती है और नौकरियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

एसेमोग्लू के अनुसार, उद्योग जगत को ऐसी एआई प्रणालियां विकसित करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए, जो कर्मचारियों की जगह लेने के बजाय उनकी क्षमताओं को बढ़ाएं। उन्होंने एआई पर होने वाली चर्चा को आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) और भविष्य की काल्पनिक आशंकाओं से आगे ले जाकर ऐसी नीतियों पर केंद्रित करने की जरूरत बताई, जिनसे कर्मचारियों को लाभ मिले।

दोनों दृष्टिकोणों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर एआई के विकास की दिशा को लेकर है। जहां एनजी उत्पादकता बढ़ने से नए रोजगार पैदा होने की संभावना पर जोर देते हैं, वहीं एसेमोग्लू आगाह करते हैं कि तकनीक का लाभ किसे मिलता है, यह उसके विकास और इस्तेमाल से जुड़े फैसलों पर निर्भर करेगा।

कुल मिलाकर, एआई के दौर में रोजगार का भविष्य केवल इस बात से तय नहीं होगा कि मशीनें क्या कर सकती हैं, बल्कि इससे भी कि कंपनियां नई तकनीक का इस्तेमाल कैसे करती हैं और शिक्षा व्यवस्था कर्मचारियों को बदलती जरूरतों के लिए कितनी प्रभावी ढंग से तैयार करती है।