वाराणसी में पीएम मोदी और मॉरीशस के पीएम रामगूलाम की द्विपक्षीय वार्ताBy Admin Thu, 11 September 2025 07:36 AM









वाराणसी- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मॉरीशसी समकक्ष नवीनचंद्र रामगूलाम ने गुरुवार को वाराणसी में मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मज़बूत बनाने पर चर्चा की।

रामगूलाम आठ दिवसीय भारत यात्रा पर हैं और वर्तमान में वाराणसी में हैं। यहां उनकी पीएम मोदी के साथ बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत-मॉरीशस के ‘उन्नत रणनीतिक साझेदारी’ को और गहराई देना है।

इससे पहले, मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री से भी मुलाकात की और नई दिल्ली और पोर्ट लुईस के बीच बहुआयामी साझेदारी पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय ने एक्स पर लिखा, “विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने आज वाराणसी में मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगूलाम से मुलाकात की। बहुआयामी साझेदारी पर चर्चा की और साझा इतिहास, संस्कृति व जन-जन के रिश्तों पर आधारित भारत-मॉरीशस की उन्नत रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।”

वाराणसी की यह बैठक दोनों देशों के बीच सभ्यतागत जुड़ाव, आध्यात्मिक संबंध और गहरे जन-जन के रिश्तों को उजागर करेगी, जिन्होंने लंबे समय से भारत-मॉरीशस संबंधों को विशेष बनाया है।

वार्ता में विकास साझेदारी और क्षमता निर्माण पर विशेष ज़ोर देने के साथ ही दोनों नेता स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशेंगे। नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्लू इकोनॉमी पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

यह चर्चा उस सकारात्मक गति पर आधारित है जो इस वर्ष मार्च में पीएम मोदी की मॉरीशस यात्रा के दौरान बनी थी, जब दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘उन्नत रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उठाया था।

हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के करीबी समुद्री पड़ोसी और महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में मॉरीशस, भारत की ‘महासागर’ (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Region) दृष्टि और ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।

मॉरीशस के साथ यह साझेदारी वैश्विक दक्षिण की सामूहिक आकांक्षाओं में भी महत्वपूर्ण योगदान मानी जाती है।

वाराणसी शिखर वार्ता भारत-मॉरीशस संबंधों में एक मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है, जो परस्पर समृद्धि, सतत विकास और सुरक्षित एवं समावेशी भविष्य की साझा प्रतिबद्धता को मज़बूत करेगी।

बुधवार को महाराष्ट्र में एक बिज़नेस कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए रामगूलाम ने कहा कि भारत-मॉरीशस साझेदारी हमेशा बनी रहेगी और मॉरीशस भारत का सबसे विश्वसनीय साझेदार है, जहां बड़े व्यापारिक अवसर मौजूद हैं।

रामगूलाम इससे पहले 2014 में भारत आए थे, जब वे पीएम मोदी और मंत्रिपरिषद के शपथग्रहण समारोह में आमंत्रित किए गए एकमात्र गैर-सार्क नेता थे।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1948 में स्वतंत्रता प्राप्त करने से पहले ही मॉरीशस उन चुनिंदा देशों में शामिल था, जिनसे स्वतंत्र भारत ने राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। यह संबंध नेतृत्व स्तर पर उच्च स्तर के विश्वास और आपसी समझ के साथ-साथ लगातार राजनीतिक संवाद से परिभाषित होता आया है।

 

With inputs from IANS

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