भारतीय सेना का बयान: पाकिस्तान के साथ आज डीजीएमओ बैठक नहीं, संघर्षविराम पर कोई समाप्ति तिथि नहींBy Admin Sun, 18 May 2025 06:19 AM









जम्मू : भारतीय सेना ने रविवार को स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच आज कोई बैठक निर्धारित नहीं है और दोनों देशों के बीच जो संघर्षविराम लागू है, वह जारी रहेगा, इसकी कोई समाप्ति तिथि निर्धारित नहीं की गई है।

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया,
"कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम आज समाप्त हो रहा है। साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि क्या आज DGMO स्तर की कोई बातचीत हो रही है? इस पर हम स्पष्ट करते हैं —
न तो आज कोई DGMO वार्ता निर्धारित है और न ही 12 मई को DGMO वार्ता में लिए गए संघर्षविराम निर्णय की कोई समाप्ति तिथि तय की गई है।"

भारत और पाकिस्तान के DGMO अधिकारियों ने 12 मई को हुई बातचीत में सीमा पर शांति बनाए रखने और संघर्षविराम का पालन करने पर सहमति जताई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट किया है कि संघर्षविराम के बावजूद पाकिस्तान के साथ व्यापार और सिंधु जल संधि पर रोक बनी रहेगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर के बडामी बाग स्थित 15 कोर मुख्यालय और गुजरात के भुज में सैनिकों से बातचीत करते हुए कहा कि भारत संघर्षविराम समझौते का पालन तभी करेगा, जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से भारत के खिलाफ किसी प्रकार की आतंकी गतिविधि की अनुमति नहीं देता।

भुज स्थित एयरफोर्स बेस पर उन्होंने कहा,
"वर्तमान संघर्षविराम का अर्थ है कि भारत ने पाकिस्तान को उसकी आचरण के आधार पर प्रोबेशन (परख) पर रखा है। अगर उसका व्यवहार ठीक रहा, तो ठीक है, लेकिन यदि कोई गड़बड़ी हुई, तो कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।"

सेना ने बताया कि देशभर में सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। सुरक्षाबलों और पुलिस को आतंकी संगठनों, उनके स्थानीय सहयोगियों और हमदर्दों के खिलाफ सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

पाकिस्तानी सेना की भारी मोर्टार गोलाबारी से जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के पास सैकड़ों सीमा निवासी विस्थापित हो गए थे।

पुंछ, राजौरी, बारामुला और कुपवाड़ा जिलों में 200 से अधिक घर और दुकानें पाकिस्तान द्वारा नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने से नष्ट हो गईं।

अब भी स्थायी शांति को लेकर संशय में जी रहे सीमावर्ती लोग अपने परिवारों के साथ धीरे-धीरे वापस लौट रहे हैं ताकि पशुधन, खेत और रोजमर्रा के कार्यों की देखभाल कर सकें।

 

(With inputs from IANS)

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