‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की ओर से नहीं हुआ कोई परमाणु संकेत: संसदीय समिति को जानकारीBy Admin Mon, 19 May 2025 02:30 PM









नई दिल्ली: हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच उत्पन्न सैन्य तनाव के संबंध में संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति को बताया गया कि पाकिस्तान की ओर से कोई परमाणु संकेत नहीं मिला। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता में समिति की बैठक सोमवार को हुई, जिसमें पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के कूटनीतिक और सैन्य प्रभावों पर चर्चा की गई। इस हमले में कई लोगों की जान गई थी और भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था।

सूत्रों के अनुसार, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने समिति को सीमा-पार सुरक्षा, सैन्य तैयारी और क्षेत्रीय कूटनीति जैसे कई अहम मुद्दों पर जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से यह स्पष्ट किया कि बढ़े हुए तनाव के बावजूद पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों से संबंधित कोई संकेत या गतिविधि नहीं दिखाई — जिसे भारत की खुफिया एजेंसियां आम तौर पर ऐसे हालात में बहुत करीब से मॉनिटर करती हैं।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सेना द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच कई दिनों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

हालांकि, दोनों देशों के बीच आपसी समझ बनने के बाद 10 मई तक सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमति बनी, जिससे नियंत्रण रेखा (LoC) पर स्थिति एक बार फिर से शांत हो गई।

बंद दरवाजों के पीछे हुई इस ब्रीफिंग में विदेश सचिव ने यह भी बताया कि क्षेत्रीय परिस्थितियों में बदलाव को देखते हुए भारत अपनी विदेश नीति को कैसे पुनर्संतुलित कर रहा है। उन्होंने भारत की पाकिस्तान के प्रति मौजूदा कूटनीतिक नीति और इसका दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी बात की।

सूत्रों ने बताया कि मिस्री की प्रस्तुति में क्षेत्रीय समीकरणों का विश्लेषण भी शामिल था, जिसमें बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों को लेकर बातचीत हुई, साथ ही कनाडा जैसे देशों के साथ पैदा हो रही कूटनीतिक चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।

यह पहली बार नहीं है जब विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विदेश मामलों की समिति को संवेदनशील मुद्दों पर जानकारी दी है। यह जानकारी नियमित रूप से देना सरकार की उस पहल का हिस्सा है जिसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर संसदीय निगरानी सुनिश्चित की जाती है।

 

With inputs from IANS

 

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