




नई दिल्ली। नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के संस्थापक और महासचिव शांतनु डे ने सोमवार को कहा कि तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के उनकी पार्टी में प्रस्तावित विलय पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर कई सवाल और आपत्तियां हैं, जिन पर विस्तृत चर्चा के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।
शांतनु डे ने कहा कि एनसीपीआई की विचारधारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से काफी हद तक मेल खाती है, इसलिए दोनों स्वाभाविक सहयोगी हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों को पार्टी में शामिल करने के मुद्दे पर अभी सहमति नहीं बनी है और कई वरिष्ठ नेता इस पर और विचार-विमर्श चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “पार्टी अध्यक्ष ने यह फैसला एकतरफा तरीके से लिया। इस बारे में न तो मुझसे और न ही अन्य वरिष्ठ नेताओं से कोई चर्चा की गई थी। मुझे भी इसकी जानकारी रविवार शाम को ही मिली।”
त्रिपुरा से संबंध रखने वाले इस राजनीतिक दल के संस्थापक ने कहा कि वह भाजपा और एनडीए के नेताओं के साथ संवाद बढ़ाने तथा लोगों तक पार्टी की पहुंच और प्रभाव को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।
शांतनु डे की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से मुलाकात कर उन्हें सूचित किया कि उन्होंने एनसीपीआई में विलय का फैसला किया है और लोकसभा में अलग समूह के रूप में बैठने की अनुमति चाहते हैं।
बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावती रुख अपनाते हुए एनसीपीआई में शामिल होने का फैसला किया है। इन सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने की भी घोषणा की है।


राजनीतिक जानकारों के अनुसार, दो-तिहाई सांसदों के समर्थन के साथ किया गया यह कदम दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचाव का रास्ता भी प्रदान कर सकता है।
एनसीपीआई फिलहाल चुनाव आयोग में पंजीकृत, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है, जिसकी जमीनी उपस्थिति सीमित मानी जाती है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में ‘अपने अधिकार बचाइए, राजनीतिक दलबदलुओं को नकारिए’ के नारे के साथ कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था।
यदि तृणमूल के बागी सांसदों का विलय औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया जाता है, तो एनसीपीआई एनडीए के भीतर प्रमुख सहयोगी दलों में शामिल हो सकती है। वर्तमान में Janata Dal (United) के 12 और Telugu Desam Party के 16 सांसद लोकसभा में हैं।
With inputs from IANS
